मुख्यमंत्री के आदर्श गाँव का सच आया सामने बच्चे जमीन पर बैठ पढ़ने को मजबूर

मुख्यमंत्री के आदर्श गाँव का सच आया सामने बच्चे जमीन पर बैठ पढ़ने को मजबूर

मुख्यमंत्री के आदर्श गाँव का सच आया सामने बच्चे जमीन पर बैठ पढ़ने को मजबूर-आवाज उठाओ सच बताओ अभियान की टीम ने वर्तमान मुख्यमंत्री और पूर्व सांसद श्री आदित्यनाथ नाथ द्वारा गोद लिए आदर्श गाँव जंगल औराही की जमींनी हकीकत जानी।

गांव को बाहर से देखने पर तो लगा कि इस गांव में काफी विकास किया गया होगा क्योंकी इस गांव के बाहर की सड़के काफी अच्छी मिली।

लेकिन जैसे ही टीम गांव के अन्दर पहुंची तब इस गांव के विकास की पोल खुलने लगी।

एक दिन अगर हल्की सी बारिश हो जाए तो इस गांव के लोगो का आना जाना भी दुश्वार हो जाता है यह गांव स्वास्थ्य, शिक्षा, साफ सफाई तीनो में काफी पीछे है।

जनपद गोरखपुर के विकास खण्ड चरगांवा अन्तर्गत ग्राम सभा जंगल औराही को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोद लिए हुए है|

मुख्यमंत्री बनने से पूर्व योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से सांसद थे।

उसी समय उन्होने ग्राम जंगल औराही को गोद लिया था।

मुख्यमंत्री बनने के बाद बड़ी थी उम्मीदे

जैसे ही योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने गांव के लोगो के चेहरे की रौनक बढ़ गई लोगो ने यह सोचा की जब योगी जी मुख्यमंत्री बन गए है तो अपने गांव का अच्छा विकास करेंगें |

लेकिन जब आवाज उठाओ सच बताओ अभियान की टीम गाँव में पहुंची तो गांव के बाहर की सड़को का नजारा देखने को मिला तो ऐसा लगा कि इस गांव का सच में विकास हुआ है।

लेकिन जैसे ही टीम गांव के अन्दर पहुंची तो वहां का नजारा कुछ और ही देखने को मिला इस गांव की सड़कों पर कचरे में चलते हुए लोग दिखाई दिए साथ ही साथ गांव के लोगों ने बताया कि यहां की ऐसी स्थिति बहुत समय पहले से बनी हुई है।

जब इस गांव के लोगों से नाली के संबंध में पूछा गया तो गांव के लोगों ने बताया कि यहां पर प्रधान जी की तरफ से कोई नाली की व्यवस्था नहीं कराई गई है |

इस गांव में पहुंचकर जब आवाज उठाओ सच बताओ अभियान की टीम ने यहां की शिक्षा व्यवस्था स्वास्थ्य व्यवस्था व साफ-सफाई के संबंध में जानकारी लिया तो पता चला कि इस ग्राम सभा में मात्र 1 प्राथमिक विद्यालय और एक जूनियर हाईस्कूल है।

जो पूरी तरह से खस्ताहाल है। स्कूल में बच्चे जमीन पर बैठ पढ़ने को मजबूर है। स्कूल में एक विचित्र बात देखने मे आई कि बच्चों का भोजन चूल्हे पर बन रहा था।

साथ ही साथ स्वास्थ्य केंद्र तो एक भी नहीं है इतना ही नहीं स्वास्थ्य उप केंद्र यानी एन एम सेंटर इस ग्राम सभा में है नहीं गांव की जनसंख्या गणना के अनुसार प्रधान द्वारा 5213 बताइ गई।

न स्वस्थ केंद्र है ना ही शिक्षा को उचित व्यवस्था

अब इतने बड़े जनसंख्या वाले गांव में न हीं स्वास्थ्य केंद्र है ना ही स्वास्थ्य उपकेंद्र है प्राथमिक विद्यालय मात्र एक है| जूनियर हाईस्कूल भी मात्र एक हैं

तो स्वास्थ्य और शिक्षा की कैसी व्यवस्था होगी यह तो यहां का नजारा देखने से ही पता चलता है।

जब प्रधान जी से जानकारी ली गई उनके द्वारा दी गई जानकारी काफी अजीबो गरीब मिली प्रधान जी से जब आवास के बारे में पूछा गया उन्होंने बताया

कि हम इस ग्राम सभा के लिए 13 आवास आवंटित किए हैं जब प्रधान जी से यह पूछा गया कि आपकी इस ग्राम सभा में कितने टोले हैं

उन्होंने बताया कि 14 टोले हैं 14 में मात्र 13 आवास कहीं से भी यह बात हजम होने वाली नहीं है साथ ही साथ जब सरकारी हैंडपंप के बारे में जानकारी ली गई तो बताया गया कि 24 हैंडपंप लगाए गए हैं |

जिनमें से सभी की हालत ठीक है लेकिन जब गांव में टीम पहुंची तो एक हैंडपंप ऐसा मिला जहां से पानी निकल ही नहीं रहा था।

वहां के लोगों ने बताया कि यहां का ऐसा नजारा लगभग 1 महीने से है इस नल से पानी नहीं निकलता है हम लोगों को काफी समस्याएं होती हैं साथ ही साथ

इस ग्राम सभा के अंतर्गत एक गांव में ऐसी महिला मिली जो कि जिसके पास कच्चे पक्के कोई भी मकान नही है

सिर्फ प्लास्टिक के सहारे अपना जीवन यापन करती हैं उनकी स्थिति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि सरकार की तरफ से कोई सहायता नहीं मिली है और हमारी स्थिति ऐसी ही है

प्रधान जी से शौचालय के बारे में जानकारी ली गई उन्होंने बताया कि हमारे यहां शौचालय है

जिसमें से 120 शौचालय कंप्लीट हो गए बाकी लगभग साठ शौचालय का काम चल रहा है जब प्रधान जी से शौचालय के लिए पात्रता व मानक के बारे में जानकारी ली गई

तो प्रधान जी मानक सही ढंग से बता नहीं सके पात्रता के बारे में तो उन्हें कुछ ज्ञात ही नहीं उन्होंने तो चार पहिया वाहन और वह दो तल्ला मकान वालों को भी शौचालय दे रखा है

जबकि नियमत: गरीब व्यक्तियों को सरकारी सहायता प्रदान की जाती है |

घोटाले की भेंट चली योजनाए

इतना ही नहीं प्रधान जी से राशन कार्ड के बारे में पूछा गया तो उन्होंने राशन कार्ड की जानकारी तो सही दिया लेकिन गरीबों को किस दर पर राशन मिलना चाहिए प्रधान जी को मालूम तक नहीं था।

इस गाँव राशन कार्ड ना बनना और राशन कार्ड बनने के बावजूद राशन ना मिलना बड़ी समस्या है।

इसके बारे में जब प्रधान को ही नहीं मालूम तो गरीब क्या जाने इस ग्राम सभा की मजेदार बात

तो यह रही की इस ग्राम सभा में जो भी आवास बने हैं उसमें नरेगा की मजदूरी लाभार्थियों को मिला तक नहीं है

साथ ही साथ उन्हें पता तक नहीं कि नरेगा की मजदूरी आवास के लिए कितनी मिलती है

उसी में एक पात्र ऐसा हैं जिनका आवास कंप्लीट तक नहीं हुआ और 1,40,000रुपये पा गए।

जाने कौन है नायक इस अभियान

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