विकास पुरुष नारायण दत्त तिवारी

विकास पुरुष नारायण दत्त तिवारी- यूपी के तीन बार और एक बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस के नेता विकास पुरुष नारायण दत्त तिवारी का आज निधन हो गया। वो 93 वर्ष के थे.

विकास पुरुष नारायण दत्त तिवारी

यूपी के तीन बार और एक बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस के नेता विकास पुरुष नारायण दत्त तिवारी का आज निधन हो गया। वो 93 वर्ष के थे. विचित्र संयोग है. कि आज ही के दिन 1925 में उनका जन्म भी हुआ था। इसे त्रासदी ही कहेंगे।

वो विकास पुरुष के रूप में जाने जाते थे. यूपी को उन्होंने विकास के रास्ते पर डाला था। लेकिन कुछ संकोची भी थे। उनके बारे में एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा था, नारायण दत्त तिवारी एक कदम आगे बढ़ाते हैं. और नारायण दत्त तिवारी ही एक कदम पीछे खींच लेते हैं।

जो न नर है, न नारी वो है, वो नारायण दत्त तिवारी

विपक्षी नेता उनका मजाक उड़ाते थे, जो न नर है, न नारी वो है, वो नारायण दत्त तिवारी है। कभी उन्हें संजय गाँधी के जूते उठाने वाला बताया जाता था. लेकिन तिवारी जी कभी अन्यथा नहीं लेते थे. सरल व साधारण स्वभाव के रहे। आमतौर पर वो मृदुभाषी रहे। लेकिन एक बार पत्रकारों पर उखड़ गए जब उनसे निजी ज़िंदगी से संबंधित सवाल पूछे गए थे. टीवी चैंनलों बहुत चर्चित रहा था, वो एपिसोड।

केंद्र में भी तिवारी जी कई बार मंत्री रहे, इंडस्ट्री के और बाद में पेट्रोलियम के। राजीव गाँधी की कैबिनेट में वो विदेश मंत्री रहे। प्लानिंग कमीशन के डिप्टी चेयरमैन रहे। विकास पुरुष नारायण दत्त तिवारी के रूप में आपको अलग पहचान मिली।

तिवारी जी को ज़िंदगी भर अफ़सोस रहा

1991 में वो लोकसभा चुनाव मात्र 4900 वोट से हार गए। दिलीप कुमार उनका प्रचार करने आये थे. इस हार का तिवारी जी को ज़िंदगी भर अफ़सोस रहा था। अगर वो ये चुनाव जीत गए होते तो शायद पीवी नर सिम्हाराव की जगह वो प्रधानमंत्री बने होते. और शायद देश की राजनीति आज दूसरी होती।

उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर अपनी कांग्रेस (तिवारी) पार्टी बनायी जिसमें अर्जुन सिंह जैसे की कद्दावर नेता शामिल थे. लेकिन कुछ समय बाद वो वापस कांग्रेस में आ गए।

बढ़ती उम्र में कई विवाद उनके साथ जुड़े

बढ़ती उम्र में कई विवाद उनके साथ जुड़े. आंध्र प्रदेश के राज्यपाल रहे तो सेक्स स्कैंडल ने उन्हें घेर लिया। उन्हें हटना पड़ा। महिला मित्र उज्जवला के साथ संबंधों को लेकर काफ़ी चर्चा में रहे, उसके पुत्र को अपना मानने से इंकार कर दिया। आख़िर में कोर्ट को दखल देना पड़ा. डीएनए का मिलान हुआ। और तिवारी जी को स्वीकार करना पड़ा। मई 2014 में उज्जवला से विवाह भी किया।

अंतिम दौर में राजनैतिक अस्थिरता भी रही

अंतिम दौर में राजनैतिक अस्थिरता भी रही, कभी उन्हें समाजवादी खेमे में देखा गया तो कभी बीजेपी के. लेकिन ऑफिशियली वो कांग्रेस में रहे, अंत तक।
कुल मिला कर पिछली सदी के अंतिम वर्षों में उनका राजनैतिक और निजी जीवन बहुत उथल-पुथल वाला रहा. विकास पुरुष नारायण दत्त तिवारी की मृत्यु के साथ भारतीय राजनीती का एक अध्याय समाप्त हो गया.

 

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