उस दिन सीताहरण नहीं रावणहरण हुआ

उस दिन सीताहरण नहीं रावणहरण हुआ

 

उस दिन सीताहरण नहीं रावणहरण हुआ

ये बात कोई उनसठ साल पहले की है। हमारे शहर लखनऊ के आलमबाग इलाके के चंदर नगर गेट के सामने सड़क के उस पार मौनी बाबा का मंदिर था। उसके अहाते में दशहरे के बाद रामलीला हुआ करती थी। ये मंदिर आज भी है मगर रामलीला बंद हुए अरसा हो गया।

उन दिनों सीता की भूमिका के लिए लेडी आर्टिस्ट नहीं मिलती थीं। लड़कियां भले न शर्माती हों, माता-पिता को ऐतराज़ होता था, हाय! लोग क्या कहेंगे। मजबूरी में किसी चिकने-चुपड़े लड़के के हिस्से में ये पुण्य आता था।

सीता गयाब हो गयी

एक दिन क्या हुआ कि ऐन शो शुरू होने से पहले सीता की भूमिका करने वाला लड़का गायब पाया गया। हड़कंप मच गया। तलाश के लिए चारों ओर हरकारे दौड़ाये गए। ख़बर मिली कि वो लड़का बीमार पड़ गया है। बिस्तर से हिलना-डुलना मना है। डॉक्टर ने टाइफाईड बताया है।

उस दिन सीताहरण होना था। ये तो बड़ी मुसीबत आन पड़ी। क्या किया जाए? आस-पास कोई न चिकना-चुपड़ा सही, दुबला-पतला ही मिल जाये।

बिन सीता सब सुन

चारों और नज़र दौड़ाई गई। ज़रूरत के हिसाब से एक-आध दिखा तो मगर कोई तैयार नहीं हुआ। स्टेज पर काम करना कोई खाला जी का घर तो है नहीं। बड़े बड़े सूरमाओं की फूंक सरकती है।

जब सबने हाथ खड़े कर दिए तो आखिर में रामलीला में मेक-अप आर्टिस्ट प्यारेलाल तैयार हो गया। उसने कई ड्रामों में मेक-अप आर्टिस्ट ही नहीं सेट डिज़ाइनर का काम भी किया था। स्टेज के सामने न सही, स्टेज के पीछे का तजुर्बा तो था ही। शादी नहीं की तो क्या हुआ, बारातें तो अटेंड की हैं न।

रावण के किरदार में घुसे आर्टिस्ट

मगर उसके साथ दिक्कत ये थी कि उसका जिस्म बहुत भारी था। रावण के किरदार में घुसे आर्टिस्ट से भी कहीं ज्यादा। तय हुआ कि हरण के वक़्त रावण सीता को कंधे पर नहीं लादेगा। बल्कि रावण सीता को घसीट कर ले जाएगा। और उस वक्त प्यारेलाल कतई प्रतिरोध उत्पन्न नहीं करेगा, बल्कि स्वेच्छा से घिसटता चला जायेगा।

बहरहाल, शो शुरू हुआ। हरण के दृश्य का नंबर आया। सीता बना प्यारेलाल बहुत भारी तो था ही। मगर स्टेज पर आते ही उसकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। घबराहट में पसीना-पसीना हो गया। वो स्टेज छोड़कर भागना ही चाह रहा था कि रावण ने उसका हाथ कस कर पकड़ लिया।

रावण पर भारी पड़ी सीता

अब दृश्य यों हो गया। इधर रावण सीता को पूरे जोर से अपनी ओर खींच रहा था और उधर सीता बना प्यारेलाल अपनी ओर।उस दिन सीताहरण नहीं रावणहरण हुआ मानों रस्साकशी का इवेंट चल रहा हो। इधर तमाशबीन इसे देख कर हंसते-हंसते लोट-पोट हुए जा रहे थे। प्यारेलाल जिस्म से ही नहीं ताक़त में भी रावण के किरदार में घुसे किशनलाल से बहुत भारी था।

रावण सीता की ओर खिंचा चला आया

इस रस्साकशी में प्यारेलाल जीत गया। रावण सीता की ओर खिंचा चला आया। इस जीत से प्यारेलाल बहुत खुश हुआ। दरअसल, वो भूल गया था कि वो सीता का किरदार कर रहा है। उस दिन सीताहरण नहीं रावणहरण हुआ तमाशबीन इस अप्रत्याशित हास्य दृश्य को देख कर हंसते-हंसते दोहरे हो गए।
दर्शकों को बेतरह खुश होते देख प्यारेलाल इतना खुश हुआ कि उसने रावण को कंधे पर उठा लिया – बोल रावणा, कित्थे चलणा है? उस दिन सीता हरण नहीं रावण हरण हुआ था।

वीर विनोद छाबड़ा की कलम से

Leave a Comment