सामाजिक न्याय के योद्धा कर्पूरी ठाकुर

सामाजिक न्याय के योद्धा कर्पूरी ठाकुर

सामाजिक न्याय के योद्धा कर्पूरी ठाकुर-वह पीढ़ी वाकई ख़ुशक़िस्मत है जो सच्चे समाजवादियों से रुबरू हुई है। जब पहली बार 52 में कर्पूरी जी विधायक बने, तो आस्ट्रिया जाने वाले प्रतिनिधि मंडल में उनका चयन हुआ था। उनके पास कोट नहीं था| किसी दोस्त से मांग कर गए थे।

वहां मार्शल टीटो ने देखा कि कर्पूरी जी का कोट फटा हुआ है, तो उन्हें नया कोट गिफ़्ट किया गया। आज तो लोग दिन में दस बार पोशाक ही बदलते हैं। चाहे शिवराज पाटिल हों कि भाई नरेंद्र जी।

हार्ट की सर्जरी होनी थी

कल कर्पूरी जी के छोटे बेटे को सुन रहा था। वो बता रहे थे कि 74 में उनका मेडिकल की पढ़ाई के लिए चयन हुआ, पर वो बीमार पड़ गए। राममनोहर लोहिया हास्पिटल में भर्ती थे। हार्ट की सर्जरी होनी थी।

इंदिरा जी को जैसे ही मालूम चला, एक राज्यसभा सांसद (जो पहले सोशलिस्ट पार्टी में ही थे, बाद में कांग्रेस ज्वाइन कर लिया) को भेजा और वहां से एम्स में भर्ती कराया। ख़ुद दो बार मिलने गईं। और कहा, “इतनी कम उम्र में तुम कैसे इतना बीमार पड़ गए? तुम्हें अमेरिका भेज देती हूँ, वहां अच्छे से इलाज़ हो जाएगा। सब सरकार वहन करेगी। फिर आकर पढ़ाई करना।” पर,

बेटे का इलाज़ सरकारी खर्च पर नहीं कराएंगे

जैसे ही ठाकुर जी को मालूम चला तो उन्होंने कहा कि हम मर जाएंगे पर बेटे का इलाज़ सरकारी खर्च पर नहीं कराएंगे। बाद में जेपी ने कुछ व्यवस्था कर न्यूज़ीलैंड भेजकर उनका इलाज़ कराया। अगले साल उन्होंने मेडिकल कालेज में दाखिला लिया। आज उनके बेटे-बेटी दोनों डाक्टर हैं, दामाद फोरेस्ट सर्विस में हैं, बाह्य आडंबर से कोसों दूर।

सचमुच, कर्पूरी जी ने अपने बच्चों को भी सदाचरण का पाठ पढ़ाया। पिछली पीढ़ी इसलिए भी ख़ुशनसीब है कि उसने कई उसूल वाले नेताओं को देखा है। और, हमारी नस्ल लेसर एविल को चुनने को मजबूर।

जननायक कर्पूरी ठाकुर और उनका जीवन

Sending
User Review
0 (0 votes)

Leave a Comment