#Me Too अब नही सहूँगी

#Me Too अब नही सहूँगी

#Me Too अब नही सहूँगी- अभियान को लेकर सरकार कुचल दो, बस जैसे तैसे| अभी तक तो मंशा यही दिख रही है| महिला पत्रकार के विरुद्ध 98 वकीलों की फौज खड़ी कर दी| ये तो सीधी सीधी धमकी हुई न| लेकिन क्या फर्क पड़ा? कोई डरा? बल्कि दो वीरांगनाएं और सामने आयीं अक़बर की पोल-पटी खोलने के लिए। #Me Too अब नही सहूँगी अभियान को सरकार कमजोर न समझे और न कमजोर करने की कोशिश करे|

अकबर का क्या होगा

अक़बर को पत्रकारिता जगत में सब कोई जानते हैं| आप कैसे हैं? किस किस्म के कर्मयोगी हैं? दल-बदलू अक्सर दिल बदलने की दुहाई देते हैं। मेरी निगाह में बहुत वाहियात लोग होते हैं दलबदलू. चाहे कोई भी क्यों न हो। जो अपनों का न हुआ वो दूसरों का कभी नहीं हो सकता। आप दल-बदलू हो अक़बर साहब. जिस पोस्ट पर आप बैठे हैं वो आपको ईनाम में मिली है, इसलिए मिली है क्योंकि आपने अपने दल से गद्दारी की है| कीमत मिली है आपको| दाई से पेट झुपाने की कोशिश मत करें अक़बर साहब. #Me Too अब नही सहूँगीअभियान अब महिलाओं की लड़ाई नहीं रही है. पुरुष समाज का एक बड़ा वर्ग भी पीछे खड़ा है, इसमें पत्रकार जगत की बड़ी भी शामिल है|

कल कही आपकी बहु बेटी ने हो

जज-वकील, नौकरशाह-आईपीएस भी हैं, साधारण आदमी भी. आख़िर अनेक जन की बेटी, बहु, पत्नी नौक़री करती हैं, बाज़ार में सब्जी-भाजी भी करती हैं| जब तक वो घर नहीं लौटती हैं, दिल धुक-धुक करता है| ज़रा सी देर हुई नहीं कि दिल किसी अनजान आशंका से धड़कने लगता है|

अक़बर जी, मशाल जली है

अक़बर जी, मशाल जली है, तो अंजाम तक तो पहुंचेगी ही, पूरी पूरी उम्मीद है. दूर-दराज तक जायेगी। सिर्फ इलीट वर्ग तक सीमित नहीं रहेगी| समाज के सबसे नीचे वर्ग तक जायेगी, सर्वहारा तक. हो सकता है कल को कोई जसोदा बेन भी #Me Too अब नही सहूँगी की तख्ती लेकर निकल पड़े| किसी को अपने स्वार्थ के लिए छोड़ देना भी उत्पीड़न है| कहीं ऐसा तो नहीं कि सरकार की मुख्य चिंता शायद यही हो!

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