महान दार्शनिक अमर शहीद भगत सिंह, अमर शहीद भगत सिंह के जीवन की कुछ बातें

महान दार्शनिक अमर शहीद भगत सिंह, अमर शहीद भगत सिंह के जीवन की कुछ बातें

सतीश शर्मा

महान दार्शनिक अमर शहीद भगत सिंह – आज भगत सिंह जी की 111 वी वर्षगांठ पर मेरा प्रयास भगत सिंह जी के उस पक्ष से आपको अवगत करना है जो भगत सिंह जी को एक व्यक्ति से विचारधारा बनाता है और जिससे भगत सिंह की शहादत के बाद से ही सभी को दूर रखा गया

भगत सिंह के जीवन पर आधारित फिल्मो से लेकर साहित्यों में भी भगत सिंह जी के जीवन के उस पक्ष को ही प्रमुखता के साथ प्रस्तुत किया गया

जिसने भगत सिंह को आमजनमानस के लिए हिंसक क्रांतिकारी की छवि में सीमित कर दिया

वैचारिक पक्ष जो भगत सिंह जी का महत्वपूर्ण पक्ष था उसे अब तक सामने नही आने दिया गया।

अमर विचारक भगत सिंह सिर्फ देश भक्त क्रांतिकारी नही थे

महान दार्शनिक अमर शहीद भगत सिंह ,कारतूस नही कलम के सिपाही थे भगत सिंह

महान दार्शनिक अमर शहीद भगत सिंह, अमर शहीद भगत सिंह के जीवन की कुछ बातें

वह एक अध्ययनशील विचारक ,चिंतक ,कलमकार,पत्रकार और महान दार्शनिक थे जिसने 23 वर्ष की अल्प आयु में फ्रांस रूस और आयर लैंड की क्रांति का गहन अध्ययन किया था नेशनल कॉलेज से लेकर जेल की चार दीवारों में भी उनका अध्ययन जारी था और न केवल वह स्वयं अध्ययन करते थे बल्कि सभी साथियो को जेल में दीवार को ब्लैक बोर्ड बनाकर पढ़ाते थे इतने गहन अध्ययन द्वारा ही वह महान दार्शनिक और विचारक बने अनेक भाषाओं के जानकर भगत सिंह जी ने अकाली और कीर्ति दो अखबारों के सम्पादन किया था स्व इंद्र विद्या वचस्पति के प्रसिद्ध अखबार अर्जुन और गणेश शंकर विद्यार्थी के अखबार प्रताप में संवाददाता के रूप में अनमोल लेखन किया ।

चाँद मासिक में जब्तशुदा फाँसी अंक भगत सिंह की योग्यता का उत्कृष्ट उदाहरण है दल के पर्चे ,पोस्टर और साहित्य का सृजन भगत सिंह जी स्वयं करते थे दुःख की बात तो यह है की भगत सिंह के महान दार्शनिक लेख और विचार सत्ता के ठेकेदारों के धूर्तता के कारण उन लोगो तक नही पहुँच पाये जिनके लिए भगत सिंह ने फाँसी के फंदे को खुशी-खुशी गले लगा लिया। महान दार्शनिक अमर शहीद भगत सिंह

अमर शहीद भगत सिंह के जीवन की अनजानी बातें

लाहौर केश में कोर्ट में उनके दिए विचारोतेजक बयान, उनके लेख और पत्र ना तक जनता तक पहुँचने दिए गए ना अब पहुँचने दिए जा रहे है भगत सिंह पाठ्य क्रम में पढ़ाये नही जाते और ना ही राष्ट्र के इतिहास में उनको कोई जगह दी गयी है।

पत्रकारिता को नेताओ के महिमामंडन से ही फुर्सत नही है तो वह क्या भगत सिंह के विचारों की चर्चा करेगा वह हिंदू मुस्लिम दंगो पर डिबेट करेगा लेकिन भगत सिंह का साम्प्रदायिक हिंसा पर लिखा दार्शनिक लेख पर चर्चा नही करेगा ।

असमबेली में उनके द्वारा फेके गए बम को हर साहित्य बतायेगा किन्तु उस समय फेके गए पर्चो पर जो महत्वपूर्ण वाक्य था ”हम देश की जनता की तरफ से कदम उठा रहे है ” इस बात को कोई बताने को तैयार नही है भगत सिंह ने असमबेली में बम फेककर कोर्ट को अपनी बात रखने का मंच बनाया और फाँसी का फंदा भी उनके लिए वैचारिक मंच था।

भगत सिंह महान दार्शनिक और युगद्रष्टा थे वह ऐसे युगद्रष्टा थे जो अग्रिम भविष्य के खतरों और आजदी की कीमत समझ रहा था उनके हिंदुस्तान रिपब्लिक सोशलिस्ट एसोसिएशन की बैठक में दिए भाषण से अंदाजा लगाया जा सकता है, महान दार्शनिक अमर शहीद भगत सिंह

“आजादी का मतलब यह नही है कि सत्ता गोर अंग्रेजों से काले अंग्रेजों के हाथों में आ जाए ,यह तो केवल सत्ता का हस्तांतरण हुआ वास्तविक आजादी तो तब होगी जब अन्न उगाने वाला भूखे नही रहेंगे, कपड़े बुनने वाला नंगे नही रहेंगे, मकान बनाने वाले बेघर नही रहेंगे”

ऐसे विचारशील और युगपरिवर्तक विचार थे अमर शहिद भगत सिंह के। भगत सिंह के लिए “क्रांति की शान विचरो पर तेज होती है”

भगत सिंह तुम जिंदा हो हम सबके अरमानो में

भगत सिंह जी एक विचारक ,चिंतक ,कलमकार,पत्रकार और महान दार्शनिक थे जो जिन लोगो को आजदी दिलाने के लिए उन्होंने फाँसी के फंदे को चुन लिया उन तक उनके विचार आजादी के बाद अब तक नही पहुच पाए वह अपने समकालीन विचारकों और लेखकों से आगे थे, महान दार्शनिक अमर शहीद भगत सिंह

किन्तु बेहद दुःख इस बात का हमेशा रहेगा कि उनके विचारों से डरने वाले सत्ता के ठेकेदारो ने उनके अमूल्य लेखों, पत्रों ,पर्चो और भाषणों जो देश की अनमोल धरोहर थी । उसको को जनता तक पहुँचने ही नही दिया गया जिससे देश का युवा मार्गदर्शन प्राप्त करता उसको इस देश से वंचित कर दिया गया ।

भगत सिंह के वैचारिक लेख कभी सही रूप में सामने नही आ पाए किन्तु जितने भी लेख उपलब्ध है उनसे भगत सिंह को एक महान दार्शनिक से कम कहना उनके बलिदान के साथ अन्याय होगा। महान दार्शनिक अमर शहीद भगत सिंह

हमसे और आपसे एक युगद्रष्टा के विचार छीन लिए गए लेकिन भगत सिंह तुम जिंदा हो हम सब के अरमानों में ।

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