लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ बहाली को लेकर पद यात्रा

लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ बहाली को लेकर पद यात्रा
  • लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ बहाली को लेकर पद यात्रा – लखनऊ विश्वविधालय और महाविद्यालयो के छात्र-छात्राओ के द्वारा परिसरों में छात्रो के साथ हो रहे|

छात्रसंघ चुनाव बहाली के लिए “सहयुक्त छात्रसंघ बहाली मोर्चा” के गठन किया गया. “लखनऊ विश्वविधालय” और “महाविद्यालयो” के परिसरों में छात्र-छात्रो के बीच जागरूकता अभियान चल रहा है, आगामी 11 अक्टूबर को के के वी से विभिन्न महाविद्यालय से होकर लखनऊ विश्वविद्यालय पहुचेगी.

लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ बहाली को लेकर पद यात्रा

छात्रो के साथ हो रहा अन्याय

आपको बताते चले कि लखनऊ विश्वविद्यालय और महाविद्यालयो में छात्र नेताओ और छात्रो पर लगातार निष्कासन-निलंबन किया जा रहा है. अपनी हक की मांग करने वाले छात्रो को फर्जी मामलों में निष्कासन की प्रथा जैसी बन गयी है, छात्रो से विरोध का अधिकार छीन लिया गया है।

मेस के खाने से लेकर क्लास तक कि दुर्दशा है। लेकिन छात्र यदि विरोध करता है तो उसे प्रवेश से वंचित कर दिया जाता है । यदि वह फिर भी विरोध करता है। तो उसे विभिन्न प्रकार से प्रताड़ित किया जाता है

 

समेस्टर प्रणाली विश्वविद्यालय का नया हथियार

 

लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रो की जो दशा है। उसका अंत यही नही होता है। महाविद्यालयो में बद से बत्तर हालात है। छात्रो विभिन्न प्रकार से डराया जाता है। समेस्टर सिस्टम ने विश्वविद्यालय से महाविद्यालय तक को छात्रो के उत्पीड़न का अधिकार दे दिया है। अब छात्र यदि विरोध करेगा। तो उसको समेस्टर परीक्षा में उसका परिणाम भुगतना पड़ सकता है

ल०वि ०वि० और महाविद्यालयो के छात्र-छात्रओ द्वारा सहयुक्त छात्र संघर्ष मोर्चा के गठन कर आंदोलन को तेजी प्रदान की जा रही है.  आगामी दिनों में जागरूकता अभियान, पद यात्रा का द्वारा छात्रो के बीच जाकर अपनी लड़ाई में साथ आने की अपील करेंगे|

हाईकोर्ट में दाखिल होगा वर्गीकरण

विवि द्वारा दिया जाने वाला वर्गीकरण शासन के माध्यम से कोर्ट में दाखिल किया जाएगा। 8 अक्टूबर 2012 को एलयू के छात्र हेमंत सिंह ने हाईकोर्ट में रिट दाखिल की थी कि चुनाव के लिए प्रत्याशी की उम्र एकेडमिक सेशन की शुरूआत से देखी जाए,

जबकि संविधान के अनुसार उम्र को नाॅमिनेशन की तिथि पर देखा जाता है। इसके अलावा उस सत्र में चुनाव में देरी हुई थी, जिसमें हेमंत ने कहा कि चुनाव सत्र शुरू होने की छह से आठ सप्ताह के अंदर होना चाहिए। उसी समय हाईकोर्ट में छात्रसंघ चुनाव से जुड़ा एक और मामला भी था। कानपुर  के पीपीएन काॅलेजो का यह मामला दिसंबर 2011 का था,

जिसमें उसने कहा कि विवि का वर्गीकरण होने पर ही वह चुनाव करा सकता है। जब हेमंत सिंह का मामला कोर्ट गया तो उसे कानपुर वाले केस के साथ क्लब कर दिया गया, जिसके बाद चुनाव पर स्टे हो गया, लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ बहाली को लेकर पद यात्रा।

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