किसान करेंगें पैदल मार्च

किसान मुक्ति मार्च पहुँचा रामलीला मैदान किसानों ने भरी हुँकार

किसान करेंगें पैदल मार्च

किसान करेंगें पैदल मार्च-29 नवम्बर को यह किसान चारों दिशाओं से पैदल मार्च करते हुए रामलीला मैदान तक पहुंचेंगे। और 30 नवम्बर को रामलीला मैदान से पैदल संसद मार्ग पहुंचेंगे और अपनी आवाज़ देश की सत्ता तक पहुचायेंगे।

किसान एकजुट हो चुके हैं, अब और नहीं सहेंगे:
यह लड़ाई आज शुरू हो चुकी है। अबदेश के सभी सच्चे किसान संगठन “अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति” के झंडे तले आ गए हैं। पहली बार देश के कोने-कोने से 201 किसान संगठन एक साथ जुड़ गए हैं।

खेती घाटे का सौदा बन गयी है

देश का अन्नदाता किसान अब केवल नाम के लिए रह गया है। किसान अपने बच्चो को पाल नही पा रहा है। ना उसके पास पैसा है,ना ईज्जत है।

खेती घाटे का सौदा बन गयी है। किसान पहले तो अच्छी फसल पैदा करने के लिए संघर्ष करता है। फिर फसल की कीमत पाने के लिए आंदोलन करे।

एक मुठ्ठी बीज से एक बोरा अनाज पैदा कर रहे हैं

किसान उतनी ही मेहनत कर रहे हैं। एक मुठ्ठी बीज से एक बोरा अनाज पैदा कर रहे हैं। कोई उद्योग या नौकरी ऐसा चमत्कार नहीं करती है। देश की आजादी होने के समय किसान 33 करोड़ भारतवासियों का पेट भरते थे, अब 130 करोड़ का।

अब पहले से पांच गुना ज्यादा अन्न पैदा कर रहे हैं। खेती से जुड़ा हर धंधा फल-फूल रहा है। आढ़ती से लेकर व्यापारी तक, बीज-खाद की कंपनी हो या ट्रेक्टर की सब मुनाफे में हैं। बस किसान घाटे और कर्जे में है।

अपनी हालत से तंग आकर हर 45 मिनट में देश में एक किसान कहीं न कहीं आत्महत्या कर रहा है।इसके लिए किसान खुद जिम्मेवार नहीं है।

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