किसान मुक्ति मार्च पहुँचा रामलीला मैदान किसानों ने भरी हुँकार

किसान मुक्ति मार्च पहुँचा रामलीला मैदान किसानों ने भरी हुँकार

किसान मुक्ति मार्च पहुँचा रामलीला मैदान किसानों ने भरी हुँकार

किसान मुक्ति मार्च पहुँचा रामलीला मैदान किसानों ने भरी हुँकार-किसान मार्च आज पहुँचा रामलीला मैदान। स्वामी नाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की मांग कर रहे है।
मोदी सरकार की किसान विरोधी नीतियों से नाराज है।किसान मुक्ति मार्च मुख्य मुद्दा कर्जमाफी और फसलों की लागत का डेढ़ गुना मुआवजा चाहते हैं।

किसान (Kisan Mukti March) इस बार सिर्फ दो मांगों को लेकर यह आंदोलन कर रहे हैं।

उनकी पहली मांग है कि उन्हें कर्ज से पूरी तरह मुक्ति दी जाए और दूसरी अपनी दूसरी मांग में फसलों की लागत का डेढ़ गुना मुआवजा चाहते हैं। तीसरी मांग है कि वह विशेष संसद सत्र चाहते हैं।

किसानों को अपना समर्थन देने कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी भी पहुंचे

राहुल ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा; ”आज भारत में किसान और नौजवानों के मुद्दे सबसे अहम हैं। मोदी सरकार ने 15 लोगों के साढ़े 3 लाख करोड़ क़र्ज़ माफ़ किए।
तो किसानों का क़र्ज़ क्यों नहीं माफ़ किया जा सकता. इस देश को कोई एक व्यक्ति, एक पार्टी नहीं बल्कि देश के किसान और मज़दूर चलाते हैं।”

201 किसान संगठन एक साथ आये एक साथ

किसान करेंगें पैदल मार्च

एक मुठ्ठी बीज से एक बोरा अनाज पैदा कर रहे हैं

अब किसान खुद अपने हाथ से अपनी किस्मत लिखने जा रहे हैं। सब सरकारों के झूठे वादों और खोखले दावों से अब किसान तंग आ गए हैं।

4 साल पहले किसानों ने मोदी सरकार पर भी भरोसा किया था, लेकिन वे सच समझ गए हैं।पहली बार देश के कोने-कोने से 201 किसान संगठन एक साथ जुड़ गए हैं।

किसान उतनी ही मेहनत कर रहे हैं। एक मुठ्ठी बीज से एक बोरा अनाज पैदा कर रहे हैं। कोई उद्योग या नौकरी ऐसा चमत्कार नहीं करती है। देश की आजादी होने के समय किसान 33 करोड़ भारतवासियों का पेट भरते थे, अब 130 करोड़ का।

हर 45 मिनट में एक किसान आत्महत्या कर है

अब पहले से पांच गुना ज्यादा अन्न पैदा कर रहे हैं। खेती से जुड़ा हर धंधा फल-फूल रहा है। आढ़ती से लेकर व्यापारी तक, बीज-खाद की कंपनी हो या ट्रेक्टर की सब मुनाफे में हैं। बस किसान घाटे और कर्जे में है।

अपनी हालत से तंग आकर हर 45 मिनट में देश में एक किसान कहीं न कहीं आत्महत्या कर रहा है।इसके लिए किसान खुद जिम्मेवार नहीं है।

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