कर्पूरी ठाकुर जी के डॉ लोहिया पर विचार

कर्पूरी ठाकुर जी के डॉ लोहिया पर विचार

कर्पूरी ठाकुर जी के डॉ लोहिया पर विचार-डॉ लोहिया सुधारवादी होने के साथ एक क्रांतिकारी थे।

डॉ लोहिया एक देशीय नहीं थे नहीं थे ,सर्व देशीय थे।
डॉक्टर लोहिया राष्ट्रवादी होते हुए विश्ववादी थे।

राष्ट्रीयता के पुजारी होते हुए भी अंतरराष्ट्रीयता के पृष्ठपोषक थे।

डॉ लोहिया एक एक देश की गुलामी को खत्म करने में नहीं सम्पूर्ण देशों की गुलामी को खत्म करने में विश्वास रखते थे और उसके लिए निरंतर प्रयास करते थे।

इससे भी आगे डॉ लोहिया केवल गुलाम मुल्कों की ही आजादी नहीं चाहते थे बल्कि इस संसार के सभी देशों के गुलाम इंसानों की भी आजादी चाहते थे।

संसार के कोने-कोने में समता आये

डॉ लोहिया किसी एक देश में समता नहीं चाहते थे बल्कि संसार के कोने-कोने में जहां भी विषमता है उसका अंत चाहते थे और समता चाहते थे।

डॉ लोहिया ने जो सप्त क्रांतियों का उद्घोष किया, उन सप्त क्रांतियों में केवल देश और देश के बीच की विषमता का ही अंत नहीं चाहते थे,

बल्कि देश के अंदर छोटे बड़े की विषमता का अंत बड़े की विषमता का अंत, देश के अंदर अमीर गरीब की विषमता का अंत,

देश के अंदर छोटे बड़े की विषमता का अंत, मर्दो और औरतो के बीच विषमता का अंत,

संसार के अंदर रंग पर आधारित गोरी और काली चमड़ी के बीच की विषमताओ का अंत चाहते थे।

उनकी दृष्टि समग्र थी

यानी उनकी दृष्टि एकांगी नहीं थी बल्कि उनकी दृष्टि समग्र थी।

इस प्रकार के महापुरुष के के चिंतन के संबंध में उनकी सिद्धांत और कार्यों के और उनकी नीतियों के संबंध में संक्षिप्त में व्याख्यान मेरे जैसे एक अक्षम आदमी के लिए असंभव है,

डॉ लोहिया पर कोई विशेषज्ञ ही परिपूर्णता के साथ बोल सकता है

इसलिए मैं अपनी अयोग्यता को स्वीकार कर लेता हूँ।

डॉ लोहिया वैचारिक क्रांति के प्रतिपालक थे

डॉ लोहिया वैचारिक क्रांति के प्रतिपालक थे और उन्होंने ने लिखा है

जो कुछ कहा है अपने लेखों और और कथनों और पुस्तिकाओं में कभी विस्तार से प्रकाश डाला है

कैसे हमारे चिंतन में क्रांति की आवश्यकता है डॉ लोहिया यह कहते थे कि यह की क्रांति की आवश्यकता है

विज्ञान से पुण्य वैज्ञानिक चिंतन से पुण्य दूसरा कुछ नहीं

डॉ लोहिया यह कहते थे कि यह की आवश्यकता है विज्ञान से पुण्य वैज्ञानिक चिंतन से पुण्य दूसरा कुछ नहीं परंतु वे साथ-साथ यह भी नहीं भूलते थे

की आध्यात्मिक चिंतन भी हमारी आपके के लिए आवश्यक है विज्ञान और अध्यात्म दोनों पर जोर देते थे, मगर चुकी वह राजनीतिक पार्टी में थे।

वे अतः कोई आध्यात्मिक जगत के जीव नहीं थे इसीलिए जाहिर है कि राजनीति अर्थिक सामाजिक विषयों पर अधिक बोलते थे,अधिक लिखते थे।

डॉ अध्यात्म से आंखें मूंदे नहीं थे अगर आप उनके चुनाव घोषणा पत्र को सोशलिस्ट पार्टी की ओर से चुनाव घोषणा पत्र है।

उन्होंने जो प्रकाशित किया था जोकि व्हील ऑफ हिस्ट्री इतिहास तो आपको पता चल जाएगा की की वे आध्यात्मिक दृष्टि से चिंतन करते थे, सोचते थे।

अगर लोहिया को समझना चाहते है तो सोच में परिवर्तन को तैयार रहे

मगर जैसा हमने कहा कि उनकी मुख्य विचारधारा राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक थी।

जिसकी विशद व्याख्यान उन्होंने विभिन्न प्रकार से की थी।

अपने भाषणों के क्रम में,अपनी कलम के द्वारा, अपनी लेखनी के द्वारा इसीलिए अभी हम यह कहना चाहते हैं

कि बुनियादी चिंतन में अगर हम डॉ लोहिया के बारे में सोचते हैं

तो कुछ परिवर्तन करने को तैयार हैं या नहीं

अगर बुनियादी चिंतन में परिवर्तन करने को तैयार नहीं है

तो जैसे देश चल रहा है वैसे ही चलेगा में सुनाता रहूँगा आप सुनते रहँगे

Sending
User Review
5 (1 vote)

Leave a Comment