भारतीय रुपया की कीमत बंगलादेशी टके से नीचे

भारतीय रुपया की कीमत बंगलादेशी टके से नीचे

भारतीय रुपया की कीमत बंगलादेशी टके से नीचे-पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया पर यह खबर बहुत तेजी से वायरल हो रही है। कि भारतीय मुद्रा रुपया की कीमत बंगलादेश की मुद्रा से भी कम हो गई।

युवजन वॉइस की टीम ने जब इस बात की जानकारी प्राप्त की तो यह बात सही पाई गई।

अंतराष्ट्रीय बाजार में रूपय की कीमत बंगलादेश के टके से भी कम हो गई है।

भारतीय मुद्रा रुपया की कीमत की अंतराष्ट्रीय बाजार में 0.86 जबकि बंगलादेश की मुद्रा टका की कीमत 1 है।

रुपये की कीमत क्यों घटती बढ़ती है

रुपये की कीमत पूरी तरह इसकी मांग एवं आपूर्ति पर निर्भर करती है।

इस पर आयात एवं निर्यात का भी असर पड़ता है।दरअसल हर देश के पास दूसरे देशों की मुद्रा का भंडार होता है,

जिससे वे लेनदेन यानी सौदा (आयात-निर्यात) करते हैं।इसे विदेशी मुद्रा भंडार कहते हैं।

समय-समय पर इसके आंकड़े रिजर्व बैंक की तरफ से जारी होते हैं।

विदेशी मुद्रा भंडार के घटने और बढ़ने से ही उस देश की मुद्रा पर असर पड़ता है।

अमेरिकी डॉलर को वैश्विक करेंसी का रुतबा हासिल है।

इसका मतलब है कि निर्यात की जाने वाली ज्यादातर चीजों का मूल्य डॉलर में चुकाया जाता है।

यही वजह है कि डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत से पता चलता है कि भारतीय मुद्रा मजबूत है या कमजोर।

अमेरिकी डॉलर को वैश्विक करेंसी इसलिए माना जाता है,

क्योंकि दुनिया के अधिकतर देश अंतर्राष्ट्रीय कारोबार में इसी का प्रयोग करते हैं।

यह अधिकतर जगह पर आसानी से स्वीकार्य है।

यह एक उदाहरण द्वारा समझे

अंतर्राष्ट्रीय कारोबार में भारत के ज्यादातर बिजनेस डॉलर में होते हैं।

आप अपनी जरूरत का कच्चा तेल (क्रूड), खाद्य पदार्थ (दाल, खाद्य तेल ) और इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम अधिक मात्रा में आयात करेंगे तो आपको ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ेंगे।

आपको सामान तो खरीदने में मदद मिलेगी, लेकिन आपका मुद्राभंडार घट जाएगा।

मान लें कि हम अमेरिका से कुछ कारोबार कर रहे हैं।

अमेरिका के पास 71000रुपए हैं और हमारे पास 1000 डॉलर।

अगर आज डॉलर का भाव 71.51 रुपये है तो दोनों के पास फिलहाल बराबर रकम है।

अब अगर हमें अमेरिका से भारत में कोई ऐसी चीज मंगानी है, जिसका भाव हमारी करेंसी के हिसाब से 7100रुपये है तो हमें इसके लिए 100 डॉलर चुकाने होंगे।

अब हमारे विदेशी मुद्रा भंडार में सिर्फ 900 डॉलर बचे हैं। अमेरिका के पास 74,800 रुपये।

इस हिसाब से अमेरिका के विदेशी मुद्रा भंडार में भारत के जो 71,000 रुपए थे, वो तो हैं ही,

लेकिन भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में पड़े 100 डॉलर भी उसके पास पहुंच गए।

अगर भारत इतनी ही राशि यानी 100 डॉलर का सामान अमेरिका को दे देगा तो उसकी स्थिति ठीक हो जाएगी।

यह स्थिति जब बड़े पैमाने पर होती है तो हमारे विदेशी मुद्रा भंडार में मौजूद करेंसी में कमजोरी आती है।

इस समय अगर हम अंतर्राष्ट्रीय बाजार से डॉलर खरीदना चाहते हैं, तो हमें उसके लिए अधिक रुपये खर्च करने पड़ते हैं।

जाने क्या होता है आप पर असर

भारत अपनी जरूरत का करीब 80% पेट्रोलियम उत्पाद आयात करता है।

रुपये में गिरावट से पेट्रोलियम उत्पादों का आयात महंगा हो जाएगा।

इस वजह से तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल के भाव बढ़ा सकती हैं।

डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई बढ़ जाएगी, जिसके चलते महंगाई बढ़ सकती है।

इसके अलावा, भारत बड़े पैमाने पर खाद्य तेलों और दालों का भी आयात करता है

रुपये की कमजोरी से घरेलू बाजार में खाद्य तेलों और दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं

क्या होगा आप पर सीधा असर

एक अनुमान के मुताबिक डॉलर के भाव में एक रुपये की वृद्धि से तेल कंपनियों पर 8,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ता है।

इससे उन्हें पेट्रोल और डीजल के भाव बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ता है।

पेट्रोलियम उत्पाद की कीमतों में 10 फीसदी वृद्धि से महंगाई करीब 0.8 फीसदी बढ़ जाती है।

इसका सीधा असर खाने-पीने और परिवहन लागत पर पड़ता है।

किस तरह होती ऐसे हालात में देश की मदद

इस तरह की स्थितियों में देश का केंद्रीय बैंक RBI अपने भंडार और विदेश से खरीदकर बाजार में डॉलर की आपूर्ति सुनिश्चित करता है।

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