डॉ शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में दिव्यांग छात्रों के अधिकारों का हनन

डॉ शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में दिव्यांग छात्रों के अधिकारों का हनन

डॉ शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में दिव्यांग छात्रों के अधिकारों का हनन-हमेशा से विवादों में घिरे रहने वाले , दिव्यांग छात्रों की एक भी न सुनने वाले प्रसिद्ध विश्वविद्यालय

डॉ शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में फिर से सामान्य छात्रों के साथ साथ दिव्यांग छात्रों को सुविधाएं उपलब्ध न करवाते हुए

इस तरह छात्र छात्राओं को परेशान किया जा रहा है की छात्र प्रवेश लेने के बाद कोर्स छोड़ने को मजबूर हैं

और छोड़ रहे हैं और तो और कुछ छात्र रेलवे स्टेशन पर सोने को मजबूर हैं,

जब कोई छात्र अपने कुलपति महोदय से मिलने के लिए जाता है

तो उनके P.A के द्वारा मिलने नहीं दिया जाता है और भागा दिया जाता है।

मेस फीस की हो रही है अवैध वसूली

जिस कारण छात्रों को बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

1- सामान्य छात्रों के साथ साथ दिव्यांग छात्रों को भी डबल P.G. में एडमिशन लेने पर छात्रावास का आवंटन न करना

जबकि विगत वर्षों तक ऐसी कोई नियमावली नहीं थी,

और यह नियमावली छात्रों को एडमिशन लेने के बाद प्रकाशित की गई।

2-सामान्य छात्रों की भांति दिव्यांग छात्रों से भी छात्रावास मेस की फीस लेने की नियमावली,

जबकि विगत वर्षों तक दिव्यांग छात्रों को मेस की सुविधा निःशुल्क दी जाती थी।

3-छात्रावास तथा मेस की फीस में निरंतर वृद्धि हो जबकि खाने की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं।

छात्रों के साथ हो रहा है दुर्व्यवहार

4- कुलपति महोदय का छात्रों से न मिलना, छात्रों को कुलपति महोदय से

मिलने के लिए जाने पर उनको कुलपति कार्यालय से भगा दिया जाना।

5-विश्वविद्यालय के अधिकारियों का छात्रों से दुर्व्यवहार करना।

6- समय से छात्रावास का आवंटन न कर छात्राओं से छात्रावास में रहने पर 250/- प्रतिदिन

और खाने का अलग से लेकर धन उगाही करना

जबकि कुछ कोर्सों की clases सुचारू रूप से शुरू हो चुकी हैं।

दिव्यांग छात्रों के साथ हो रहा है अन्नाय- शरद यादव अध्यक्ष छात्रसभा (शकुन्तला मिश्रा विश्वविद्यालय)

डॉ शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में छात्रों की समस्याओं के लिए लड़ने वाले

समाजवादी छात्र सभा के इकाई अध्यक्ष शरद यादव ने बताया कि

उपर्युक्त समस्याओं के बावजूद भी छात्र-छात्राओं में इतना भय का माहौल पैदा किया जा चुका है

कि कोई छात्र जल्दी से अपनी समस्याओं को लेकर सामने नहीं आ पाता।

जब हम इन बातों को लेकर आंदोलित होते है तो प्रशासन इस प्रकार अनभिज्ञता दिखाते है

की इन मामलों की कोइ जानकारी नही है किंतु बिना प्रशासन की जानकारी के यह कृत्य संभव नही है।

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