डॉ राम मनोहर लोहिया तब और अब

डॉ राम मनोहर लोहिया तब और अब -लोहिया पहले मार्क्सवादी समाजवादी थे, किन्तु धीरे-धीरे लोहिया जी ने भारत मे नवीन समाजवादी सिद्धान्त निर्मित किया।

आज लोहिया जी की पुण्यतिथि है उनको पूरी दुनिया में समाजवादी आंदोलन श्रद्धांजलि दी रहा है।

डॉ राम मनोहर लोहिया तब और अब

मैं इंटरमीडिएट था। जब पहली बार ओंकार शरद जी द्वारा लिखित ‘लोहिया जी की जीवनी’ पढ़ने का अवसर मिला था। उस दिन से आज तक लोहिया जी से ऐसा जुड़ाव हुआ। जिसने लोहिया जी को पढ़ने को प्रेरित किया।

लोहिया आत्मा से विद्रोही थे। उनके विद्रोही व्यक्तिवत में विचार प्रतिभा और कर्मठता का मेल था । लोहिया की समस्त कृतियों के रूप में अन्याय का तीव्रतम प्रतिकार हो रहा है। उनमें प्रबल इच्छा शक्ति, सयम,असीम शौर्य और धीरज था। बारम्बार आहत होकर भी उन्होंने कभी समझौता नही किया ।वह राजनीति के अजेय योद्धा थे किंतु उन्होंने सारा जीवन ही बनवास जैसा ही काटा।

राम मनोहर लोहिया और उनका समाजवाद

लोहिया साहित्य प्रेमी थे यह भी उनके प्रति मेरे आकषर्ण का कारण है। लोहिया साहित्यकारों की भूमिका पर बड़ा विश्वास करते थे। साहित्य के प्रति लोहिया का लगाव था। साहित्यकार लक्ष्मीकांत वर्मा अपने साहित्य में बताते है कि लोहिया जी लेखकों की नई कृतिया पढ़कर वे चर्चा भी करते थे। एक बार नागार्जुन की एक कविता सुनकर वे फफककर रो पड़े। इतने प्रफुल्लित हुए थे कि कई लोगो मे वह कविता लिखवाकर बांटा था औए हर से दस-दस कृतिया उतारकर बटाने को कहा था। लोहिया कवि बीबी अवश्य थे, उनकी भाषा की उड़ान देखकर लगता है लोहिया का व्यक्तित्व, कृतित्व और उनका जीवन संघर्ष ,उनकी विचारधारा देश की नई पीढ़ी को प्रेरित कर रहा है।

जयप्रकाश नारायण की विचारधारा और जीवन परिचय

लोहिया मूलतः एक समाजवादी लेखक और विचारक चिंतक थे। वह अपना अधिकांश समय पढ़ने लिखने में ही बिताया, जन, मैनकाण्ड का संपादन,पार्टी का धोषणापत्र इनसे कुशल लेखक होने का सबूत है। उनके व्यक्तिगत लेख समता और सम्पन्नता, अर्थशास्त्र मार्क्स से आगे,भारत के शासक आदि लेख उनके विचारों के करीब करते है। देश विदेश लेखक उनसे जुड़ थे। उनके जीते जी उन्हें कम समझा गया किन्तु अब उनकी कीमत समझ आ रही है।

लेखक-सतीश शर्मा समर

डॉ राम मनोहर लोहिया तब और अब

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