डॉ आंबेडकर सच्चे देशभक्त: जननायक कर्पूरी ठाकुर के भाषण के कुछ अंश

डॉ आंबेडकर सच्चे देशभक्त

डॉ आंबेडकर सच्चे देशभक्त: जननायक कर्पूरी ठाकुर के भाषण के कुछ अंश

डॉ आंबेडकर सच्चे देशभक्त: जननायक कर्पूरी ठाकुर के भाषण के कुछ अंश-डॉ आंबेडकर सच्चे एवं संपूर्ण अर्थो में एक देशभक्त थे देशभक्त लोग हुए हैं और होते हैं।

डॉक्टर अंबेडकर भिन्न प्रकार के देश भक्त थे। देशभक्त वे भी हो सकते है।

जो केवल अपने देश की स्वतंत्रता के लिए लड़े, स्वतंत्रता के लिए जान दे दे,

देश पर विदेशी आक्रमण हो तो प्राण न्योछावर कर दे लड़ते हुए।

मगर बाबा साहब डॉ अंबेडकर जिस प्रकार के देश भक्त थे, उनकी देशभक्ति सिर्फ एक हद तक सीमित नही थी।

उनकी देशभक्ति व्यापक थी। इनकी देशभक्ति में सम्पूर्णता थी।

क्योंकि वे राजनीतिक क्रांति के साथ आर्थिक एवं सामाजिक क्रांति भी करना चाहते थे।

आप देखेंगे कि कांग्रेस और महात्मा गांधी से मतभेद रहते हुए भी उनका या कहना नहीं था कि अंग्रेजी राज को भारतवर्ष में रहना चाहिए।

पिछड़ो के बाबा साहब कर्पूरी ठाकुर

बहुजन समाज को मिले समान अधिकार

उनका कहना था कि देश में जो करोड़ों अछूत हैं। उनके लिए समान अधिकार की गारंटी मिलने चाहिए और

उनको भी सम्मान का जीवन व्यतीत करने की सारी सोडा सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

वह चाहे पहले जो कमीशन आया था, उसके सामने उनके दिए हुए बयान हो, चाहे 1919 की बात हो,

या 1921 से 10 वर्षों के बाद साइमन कमीशन के लिए उनके दिए हुए बयान,

चाहे 1930 में प्रथम गोमेज परिषद में उनके दिए हुए भाषण हो,

या चाहे 1931 में दितीय गोलमेज सम्मेलन में उनके दिए भाषण हो,

यदि आप उनका अध्ययन करेंगे तो इस निष्कर्ष पर पहुचेंगे कि वह भी कांग्रेस की तरह,

महात्मा गांधी की तरह ब्रिटिश राज का अंत चाहते थे। जल्द से जल्द अंत चाहते थे।

मगर वह नहीं चाहते थे कि ब्रिटिश राज जाने के बाद जो राज पूर्व में रहे,जो हजारों वर्षों से है।

और यदि वंचित समाज को उसका हक नही मिला और वही सामंती राज आ जायेगा।

बिना समानता के अधिकार स्वराज निर्थक

उनका यह कहना था कि अगर फिर से अपना राज हुआ और अछूत तो की हालत ज्यो की त्यों रह गई।

गुलाम के गुलाम रह अछूत तो फिर स्वराज से क्या फायदा?

जैसा अंग्रेजी राज अछुतो के लिए वैसा स्वदेशी राजस्व अछुतो के लिए दूसरों के लिए भले ही हो सकता है।

अपने लिए लाभप्रद एवं फलप्रद नहीं हुआ तो स्वराज का अर्थ क्या?

और यही वजह है यह लड़ाई लगातार लड़ी की अछुतो को

इस देश में समान अधिकार मिलना चाहिए समान हैसियत मिलनी चाहिए समान दर्जा मिलना चाहिए।

सतीश शर्मा समर की कलम से

जननायक कर्पूरी ठाकुर सामाजिक न्याय के योद्धा

पिछड़ो के बाबा साहब कर्पूरी ठाकुर

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