लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र नेताओं के साथ अपराधियों की तरह व्यवहार

लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र नेताओं के साथ अपराधियों की तरह व्यवहार

लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र नेताओं के साथ अपराधियों की तरह व्यवहार – लखनऊ विश्वविद्यालय में 5 जुलाई को शुरू हुआ, विवाद खत्म होने का नाम नही ले रहा है।

विश्वविद्यालय लखनऊ मे 5 जुलाई को 16 छात्रो अंकित सिंह बाबू, आशीष मिश्रा बाक्सर, प्रशांत मिश्र, आकाश लाला, मो0 शादान, शिवम् मिश्रा, अशोक कुमार प्रभात, ऋषि प्रताप सिंह, विनय यादव, हिमांशु यादव, आयुष मिश्रा, दिव्यांशु सिंह, संदीप पटेल, रजत अवस्थी तथा नीरज शुक्ला। कुलपति और प्रोफेसरो को मारने के आरोप में 307 जैसी गम्भीर धाराओं में जेल भेज दिया गया था। लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र नेताओं के साथ अपराधियो की तरह व्यवहार किया जा रहा है

छात्र नेताओं के साथ अपराधियों की तरह व्यवहार

लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र नेताओं के साथ अपराधियों की तरह व्यवहार

90 दिन से अधिक छात्रनेता जेल में

किन्तु जिस सी सी वी फुटेज के आधार पर पुलिस ने छात्रो को जेल भेजा गया, जेल भेजे गए छात्रो का आरोप है उस घटना के समय विश्वविद्यालय में ही उपस्थित नही थे और यह कुलपति महोदय का प्रायोजित रणनीति थी उनके भ्रष्टाचार पर छात्र नेताओं द्वारा जो अंकुश लगाया जा रहा था वह कुलपति को बर्दाश्त नही था इसी से परेशान होकर कुलपति ने छात्र नेताओं को जेल का यह षड्यंत्र रचा, लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र नेताओं के साथ अपराधियो की तरह व्यवहार किया जा रहा है।

 बेगुनाह है सभी छात्र नेता

दुनिया की सबसे ऊँची मूर्ति की सच्चाई?

आपको बता दे कि जिस घटना में आरोपी बनाकर छात्र नेताओं को जेल भेजा गया। छात्रनेताओ का कहना है कि वह उस घटना के समय कई छात्रनेता परिसर में उपस्थित नही थे और उन सभी छात्रों के पास इस बात का पुख्ता सबूत भी है लखनऊ विश्वविद्यालय में तथाकथित गुरु और छात्र मारपीट मामला लगातार सुर्खियों में है आज 16 छात्र नेताओं को जेल में 90 दिन से अधिक हो गए है। कोर्ट द्वारा छात्र नेताओं को जमानत नही मिल पा रही है  उधर जेल में भी लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र नेताओं के साथ अपराधियों की तरह व्यवहार हो रहा है उनको खुयात अपराधियों के साथ रखा जा रहा है और किताबे और अखबार जैसी मूलभूत चीजो से भी दूर रखा जा रहा है

लखनऊ विश्वविद्यालय में राम भरोसे

छात्रनेताओ के साथ जिस तरह का व्यवहार हो रहा है

वह शायद गुलाम भारत की याद दिला रहा है क्योंकि जिस प्रकार लखनऊ विश्वविद्यालय में  तानाशाही अपने चरम पर है कुलपति महोदय राजतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास रखते है और खुद को राजा और छात्रो को प्रजा समझ रहे है, लखनऊ विश्वविद्यालय मूलभूत सेवाओ से दूर नजर आ रहा है

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