छात्र नौजवानों के नाम बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर का संदेश

छात्र नौजवानों के नाम बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर का संदेश

छात्र नौजवानों के नाम बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर का संदेश

छात्र नौजवानों के नाम बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर का संदेश-यह इतिहासिक भाषण बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर ने आगरा, 18 मार्च 1956 में दिया था

छात्रो और नौजवानों के नाम-

मेरी छात्र नौजवानों से अपील है की शिक्षा ग्रहण करने के प्रश्चात उसका उपयोग क्लर्की में करने के बजाय उसे गाँव गरीब लोगों की सेवा में करना चाहिये। जिससे अल्पज्ञान से उतपन्न शोषण को रोका जा सके। आपका विकास समाज के विकास में ही निहित है।

“आज मैं एक बड़े खँभे की तरह हूँ, जो विशाल टेंटो को संभाल रहा है। मै उस समय के लिए चिंतित हूँ कि जब यह खंभा अपने स्थान पर नहीं रहेगा। मैं स्वस्थ नहीं रहता हूँ।

मैं नही जानता कि अब कब तक आपके बीच रहूँगा। मैं कोई ऐसा नौजवान नही ढूढ पा रहा हूँ।, जो इन करोड़ो असहाय-कमजोर और निराश जनों की उम्मीदों की जिम्मेदारी उठा सके। यदि कोई नौजवान इस जिमेदारी को उठाने के जिमेदारी ले सकेगा तो मै चैन से मरूँगा।”

शासकीय कर्मचारियों के नाम –

हमारे समाज ने शिक्षा में कुछ प्रगति प्राप्त की है। शिक्षा ग्रहण कर कुछ जन उच्च पदों पर पहुँच गये हैं।

परन्तु इन शिक्षित जनों ने हम सबको धोखा दिया है। मै उम्मीद कर रहा था कि उच्च शिक्षा ग्रहण करके

वह समाज की सेवा करेंगे। लेकिन मै देख रहा हूँ कि बड़े और छोटे क्लर्कों की भीड़ एकत्रित हो गई है।

जो सिर्फ अपना ही पेट भरने व्यस्त हैं। मेरा आग्रह है कि जो लोग शासकीय सेवाओं में नियोजित हैं।

उनका नैतिक दायित्व होना चाहिए कि वह अपनी सैलरी का 5% समाज को समर्पित करे।

तभी सम्पूर्ण समाज प्रगति हो सकेगा वरना सिर्फ कुछ लोगो की ही प्रगति होगी। जब कोई नौजवान शिक्षा प्राप्त करने जाता है।

तो संपूर्ण समाज की उम्मीदे उससे लग जाती हैं। एक शिक्षित समाज सेवक समाज के लिए वरदान साबित हो सकता है।

छात्र नौजवानों के नाम बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर का संदेश यह ओरिग्नल विडियो 

आम जनता के नाम –

विगत 30 वर्षों से आप लोगों को राजनैतिक अधिकार के लिये मै संघर्ष कर रहा हूँ।

मैने आप सब संसद और विधान सभाओं में सीटों का आरक्षण दिलवाया।

मैंने आपके बच्चों की शिक्षा के लिये उचित प्रावधान करवाये। हम सब प्रगति की ओर अग्रसर हो सकते है।

अब यह आप सबका नैतिक कर्त्तव्य है कि शिक्षा,आथिर्क और सामाजिक क्षेत्र की असमानता को समाप्त करने के लिए एक साथ होकर संघर्ष जारी रखे।

इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिये आप सबको प्रत्येक प्रकार की कुर्बानियों के लिये तैयार रहना होगा,

यहाँ तक हमको खून भी देने के लिए तैयार होना पड़ेगा।

नेताओ के नाम-

यदि कोई आपको अपने महल में बुलाता है तो स्वेच्छा से जाओ। लेकिन अपनी झौपड़ी में आग लगाकर नहीं।

यदि किसी दिन राजा और आपका विवाद हों जायेगा और महल से धक्के मार के निकाल देगा,

उस वक्त तुम कहाँ जाओगे? यदि तुम खुद को बेचना चाहते हो तो बेचो, लेकिन किसी भी कीमत पर अपने संगठन को मत बेचना।

मुझे अब दुसरो से इतना खतरा नही जितना अपने लोगो से खतरा महसूस हो रहा है।

भूमिहीन मजदूरों के नाम –

मै गाँव में रहने वाले भूमिहीन मजदूरों के लिये काफी चिंतित हूँ।

मै उनके लिए ज्यादा कुछ नहीं कर पाया हूँ। मै उनकी दुःख दर्द को नजरन्दाज नहीं कर पा रहा हूँ।

उनकी इस दशा का मुख्य कारण उनका भूमिहीन होना है।

इसी कारण वे अपमान और अत्याचार के शिकार होते रहते हैं। और वे अपना उत्थान नहीं कर पाते।

मै इसके लिये संघर्ष करूँगा। यदि सरकार इनके उत्थान में कोई बाधा पैदा करती है

तो इसके खिलाफ मजदूरों का नेतृत्व करूँगा और मजदूरों की वैधानिक लड़ाई लडूँगा।

लेकिन प्रत्येक दशा में इन भूमिहीनों को जमीन दिलाने का प्रयास करूँगा।

छात्र नौजवानों के नाम बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर का संदेश

Leave a Comment