बुलंदशहर घटना का सच

बुलंदशहर घटना का सच

बुलंदशहर घटना का सच

बुलंदशहर घटना का सच-तहसीलदार राजकुमार भास्कर ने बातचीत में कहा,

“गन्ने के खेत में मांस लटक रहा था

ऐसा लग रहा था मानो हैंगर में कपड़े लटक रहे हों।

ये बड़ा अजीब लग रहा था कि आखिर ऐसा कोई क्यों करेगा।”

बुलंदशहर में पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की हत्या ने सबको को हिला दिया।

पुलिस की शुरुआती जांच और वहां मौजूद लोगों की बातों से ऐसा लगता है

कि इंस्पेक्टर की हत्या सुनियोजित तरीके से की गई।

हत्या का मकसद था इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैलाना।

गोकशी के शक में लोगों ने जमकर हंगामा किया।

यहां गुस्साए लोगों ने हंगामा करते हुए पुलिस पर पथराव और फायरिंग कर दी,

जिसमें एक इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह और एक युवक की मौत हो गई।

इस घटनाक्रम के दौरान उपद्रवियों ने आगजनी भी की।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है

कि इंस्पेक्टर के सिर में गोली मारी गई।

बाएं भौं के नजदीक 32 बोर बुलेट से हमला किया गया।

वहीं 20 साल के सुमित की मौत पुलिस की फायरिंग से हुई।

घटनाक्रम पर नज़र डालें तो इसे संयोग ही कहा जाएगा

कि आसपास हो रही कुछ चीजें आपस में जुड़ी हैं।

क्या ये संयोग था?

यह घटना महाव नामक गाँव मे हुई ।

वहाँ सबसे पहले पहुँचने वाले प्रशासनिक अधिकारी तहसीलदार राजकुमार भास्कर थे।

बातचीत में उन्होंने कहा,

‘गन्ने के खेत में गोमांस लटक रहा था।

ऐसा लग रहा था मानो हैंगर में कपड़े लटक रहे हों।

सवाल उठता है कि आखिर ऐसा कोई क्यों करेगा।

हर कोई राज्य के मौजूदा हालात से वाकिफ है।

”तहसीलदार ने कहा जैसे ही इलाके में गोमांस की बात

फैली हिन्दू युवा वाहनी, शिव सेना और बजरंग दल के

कुछ सदस्य घटनास्थल पर पहुंच गए।

और वो नारे लगा कर विरोध करने लगे।

भीड़ ने इसके बाद गो मांस को ट्रैकर पर लाद लिया और

इसे लेकर ये सब बुलंदशहर-गढ़मुक्तेश्वर हाईवे पर प्रदर्शन

करने के लिए जा रहे थे।

हालांकि जिस जगह और जिस वक्त इन लोगों ने प्रदर्शन

किया वो शक के दायरे में है।

ऐसा लगा रहा है कि ये जानबूझ कर इलाके में तनाव बढाने की कोशिश कर रहे थे।

सोमवार को ही करीब 10 लाख मुस्लिम जायरीन बुलंदशहर में जमा हुए थे।

ये सब इज्तेमा में शामिल होने के लिए आए थे।

खास बात ये है कि ये मुस्लिम जायरीन बुलंदशहर और

गढ़ मुक्तेश्वर हाईवे के रास्ते ही वापस लौटने वाले थे।

इस बीच पुलिस वहां आ गई।

वो ट्रैक्टर के आगे खड़े होकर भीड़ को शांत कराने की

कोशिश करा रहे थे।

तहसीलदार ने कहा,

”हम चाह रहे थे कि मामला वहीं पर शांत हो जाए, लेकिन भीड़ हमारी बात सुनने को तैयार नहीं थी।

”इस बीच करीब सौ लोग ट्रैक्टर पर सवार होकर हाईवे के पास चिंगरावती पुलिस थाने पर पहुंच गए।

धीरे-धीरे भीड़ बढ़ने लगी।

पुलिस ने भीड़ से FIR दर्ज करवाने को कहा, लेकिन वो हिंसा पर उतर आए।

बुलंदशहर के डीएम अनुज झा ने बताया कि उन्हें इस

घटना के बारे में सुबह 11 बजे सूचना मिली।

उन्हें बताया गया कि करीब 15-20 मरी हुई गाय

चिंगारवटी और सयाना में गांववालों को मिली है।

उन्होंने कहा; “गाय को लेकर ये सारे लोग चिंगारवटी

पुलिस स्टेशन पहुंच गए”।

पुलिस ने इन्हें FIR दर्ज करवाने को कहा लेकिन कुछ असमाजिक तत्वों ने हंगामा खड़ा कर दिया।

ऐसे में पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।

इसके बाद मामला थोड़ा बढ़ा लोगों ने पत्थरबाज़ी शुरू कर दी।

”इसी मारपीट के दौरान SHO सुबोध कुमार सिंह को गोली लग गई,

जबकि उनका एक गनर घायल हो गया.डीएम झा ने कहा, ‘वो बड़े ही बहादुर पुलिस ऑफिसर थे।

वह एक ऐसे शख्स थे जो मुश्किल हालात में कभी पीछे नहीं हटते थे।

हमने एक बहुत बड़ी ताकत खो दी है।

कई गाड़ियों में आग लगा दी गई

घटनास्थल पर मौजूद कई पुलिस अधिकारियों ने कहा कि

पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह को बचाया जा सकता था।

लेकिन भीड़ ने उन्हें हॉस्पिटल ले जाने के लिए नहीं दिया।

सबसे पहले SHO के ड्राइवर राम आश्रय ने घायल ऑफिसर को देखा।

वो फटाफट उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए अपनी गाड़ी में ले गए।

ड्राइवर ने कहा, ‘वो मैदान में गिरे पड़े थे।

मैं जैसे ही उन्हें लेकर जाने लगा भीड़ ने हंगामा शुरू कर दिया।

वो कहने लगे…. मारो…. मारो….. वो पत्थर बरसाने लगे।

गन्ने की खेत से गोलियों की आवाज़ें आ रही थी’।

सोमवार की रात news 18  पुलिस अधिकारियों से बातचीत की।

इन सबका का कहना था कि पत्थर फेंकने वाले ज़्यादातर लोग बजरंग दल, हिंदू युवा वाहनी और शिव सेना के सदस्य थे।

हालांकि ज़िले में बजरंग दल के प्रमुख योगेश राज ने इन सारे आरोपों को खारिज किया है।

उन्होंने कहा, ”हमलोग घटनास्थल पर इसलिए मौजूद थे

क्योंकि हमने पुलिस को घटना की जानकारी दी थी।

हिंसा भड़काना हमारा कोई मकसद नहीं था।’

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