बिहार लेनिन जगदेव प्रसाद कुशवाहा पुण्यतिथि विशेष

बिहार लेनिन जगदेव प्रसाद कुशवाहा पुण्यतिथि विशेष

बिहार लेनिन जगदेव प्रसाद कुशवाहा पुण्यतिथि विशेष-रूस के महान मजदूरों के नेता लेनिन जो पूरे विश्व में प्रसिद्द है,उनके बारे में तो आपने बहुत सुना होगा |

लेकिन क्या आप भारत के बिहार लेनिन जगदेव प्रसाद कुशवाहा के बारे में जानते है जिन्होंने भारत के शोषित वर्ग के खातिर अपनी जान न्योछावर कर दी |

जिनके विचारो का आज भी लोहा माना जाता है| भारत के बिहार लेनिन जगदेव प्रसाद कहते थे कि

“पहली पीड़ी के मारे जाएंगे,दूसरी पीड़ी के जेल जायेंगे,तीसरी पीड़ी के लोग राज करेंगे| “

अपने ऐसे विचारो को लेकर बिहार में जन्मे बाबू जगदीश प्रसाद आज पूरे देश में भारत के लेनिन नाम से जाने जाते है जिनकी आज पुण्यतिथि है

भारतीय समाज के दो वर्ग शोषक एवं शोषित

स्वतंत्र भारत में ऐसे राजनेता बहुत कम हुए हैं जिनकी समझ बिहार लेनिन जगदेव प्रसाद की तरह स्पष्टवादी हों।

जगदेव बाबू का मानना था कि भारत का समाज साफ़तौर पर दो तबकों मे बंटा है : शोषक एवं शोषित।

शोषक हैं पूंजीपति, सामंती दबंग वर्ग के लोग और शोषितों में किसान, असंगठित एवं संगठित क्षेत्र के मजदूर, मजलूम वर्ग शामिल हैं।

31 अक्तूबर 1969 को जमशेदपुर में उन्होंने सरदार पटेल के बारे में कहा था कि सरदार पटेल शोषित समाज के बिल्कुल साधारण परिवार में पैदा हुए थे इसलिए विशाल शोषित समाज को उन पर गर्व है।

19 जनवरी 1970 को लिखे एक निबंध में उन्होंने कहा कि जनसंघ (राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का राजनीतिक मुखौटा और

अभी की भरतीय जनता पार्टी) की नजर में भारत की सबसे बड़ी समस्या मुसलमान हैं

और जनसंघ इसी को इस देश का वर्ग संघर्ष मानता है।

यह सत्ता में बने रहने की कोशिशों का एक हिस्सा भर है।

सबको शिक्षा एक समान का नारा दिया

बिहार लेनिन जगदेव प्रसाद के संघर्षों के आलोक में अगर वर्तमान भारतीय समाज की कोढ़ बन चुकी समस्याओं का अवलोकन करें तो पाते हैं

कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से किसान एवं आदिवासी सर्वाधिक शोषित हैं।

ऐसे मामलों में शिक्षा, शिक्षण, शिक्षक और शिक्षा का व्यवसाय सभी सवालों के घेरे में आते हैं।

कौटिल्य के अर्थशास्त्र में उल्लेख है कि हम शिक्षक हैं हमारा काम है पाठ पढ़ाना।

जरूरत पड़ने पर राजा को भी पढ़ायेंगे।

हमारा एक ही उद्देश्य है कि भारत की एकता, प्रगति और अखण्डता के लिये जो भी जरूरी होगा हम करेंगे।

वर्तमान शिक्षा माफिया, सत्ता माफिया, मीडिया माफ़िया एवं धर्म माफ़िया का सारा समीकरण भारत के परम्परागत वर्ण माफ़िया के द्वारा संचालित है।

बिहार लेनिन जगदेव प्रसाद कुशवाहा के पास इसका अचूक इलाज था कि ‘चपरासी हो या राष्ट्रपति की संतान। सबकी शिक्षा एक समान।’

पढ़ो-लिखो भैंस पालो अखाड़ा खोदो और राजनीति करो

बिहार लेनिन जगदेव प्रसाद कुशवाहा ने सामाजिक न्याय को परिभाषित करते हुए कहा था

कि ‘दस प्रतिशत शोषकों के जुल्म से छुटकारा दिलाकर नब्बे प्रतिशत शोषितों को नौकरशाही

और जमीनी दौलत पर अधिकार दिलाना ही सामाजिक न्याय है।’

भारत में नस्लीय श्रेष्टता का प्रदर्शन हमेशा ही अपने परिणामों में नुकसानदायक होता है।

कितनी अजीबोगरीब बिडम्बना है कि किसी परिवार विशेष में पैदा हो जाने मात्र से ही यहाँ इंसान की पहचान निश्चित कर दी जाती है।

विश्वविद्यालय, जहाँ से इससे छुटकारा पाने की तकनीक और शोध करने की उम्मीद की जाती है,

भयंकर नस्लवाद के वीभत्स अखाड़े बने हुए हैं।

यह सवाल महत्वपूर्ण इसलिए भी है कि क्या हमारी वर्तमान शिक्षा एक बेहतर नागरिक का निर्माण कर रही है?

अथवा परम्परागत पिछड़ेपन को ही पोषित-पल्लवित कर रही है।

इस मामले में जगदेव प्रसाद ने देश की आम जनता से आह्वान किया

कि ‘पढ़ो-लिखो, भैंस पालो, अखाड़ा खोदो और राजनीति करो।’

समाजवादी विचारधारा को घर-घर पहुंचा

बिहार में उस समय समाजवादी आन्दोलन की बयार थी,

लेकिन जे.पी. तथा लोहिया के बीच सद्धान्तिक मतभेद था।

जब जे.पी. ने राम मनोहर लोहिया का साथ छोड़ दिया तब बिहार में जगदेव बाबू ने लोहिया का साथ दिया,

उन्होंने सोशलिस्ट पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत किया।

बिहार लेनिन जगदेव प्रसाद कुशवाहा समाजवादी विचारधारा का देशीकरण करके इसको घर-घर पहुंचा दिया।

जे.पी. मुख्यधारा की राजनीति से हटकर विनोबा भावे द्वारा संचालित भूदान आन्दोलन में शामिल हो गए।

भूदान आन्दोलन में जमींदारों का हृदय परिवर्तन कराकर जो जमीन प्राप्त की गयी वह पूर्णतया उसर और बंजर थी,

उसे गरीब-गुरुबों में बाँट दिया गया था, लोगों ने खून-पसीना एक करके उसे खेती लायक बनाया।

लोगों में खुशी का संचार हुआ लेकिन भू-सामंतो ने जमीन ‘हड़प नीति’ शुरू की

और दलित-पिछड़ों की खूब मार-काट की गयी,

अर्थात भूदान आन्दोलन से गरीबों का कोई भला नहीं हुआ।

उनका Labour Exploitation’ जमकर हुआ और समाज में समरसता की जगह अलगाववाद का दौर शुरू हुआ।

कर्पूरी ठाकुर ने विनोबा भावे की खुलकर आलोचना की और ‘हवाई महात्मा’ कहा।

(देखे- कर्पूरी ठाकुर और समाजवाद: नरेंद्र पाठक)

जगदेव बाबू तथा कर्पूरी ठाकुर ने बनाई गैरकांग्रेसी सरकार

बिहार लेनिन जगदेव प्रसाद कुशवाहा ने 1967 के विधानसभा चुनाव में संसोपा

(संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, 1966 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी और सोशलिस्ट पार्टी का एकीकरण हुआ था)

के उम्मीदवार के रूप में कुर्था में जोरदार जीत दर्ज की।

उनके अथक प्रयासों से स्वतंत्र बिहार के इतिहास में पहली बार संविद सरकार

(Coalition Government) बनी तथा महामाया प्रसाद सिन्हा को मुख्यमंत्री बनाया गया।

जगदेव बाबू तथा कर्पूरी ठाकुर की सूझ-बूझ से पहली गैर-कांग्रेस सरकार का गठन हुआ,

25 अगस्त 1967 को ‘शोषित दल’ नाम से नयी पार्टी बनाई,

उस समय अपने ऐतिहासिक भाषण में कहा था-

“जिस लड़ाई की बुनियाद आज मैं डाल रहा हूँ, वह लम्बी और कठिन होगी।

चूंकि मै एक क्रांतिकारी पार्टी का निर्माण कर रहा हूँ इसलिए

इसमें आने-जाने वालों की कमी नहीं रहेगी परन्तु इसकी धारा रुकेगी नहीं।

इसमें पहली पीढ़ी के लोग मारे जायेंगे, दूसरी पीढ़ी के लोग जेल जायेंगे

तथा तीसरी पीढ़ी के लोग राज करेंगे। जीत अंततोगत्वा हमारी ही होगी।”

आज जब देश के अधिकांश राज्यों की तरफ नजर डालते है

तो उन राज्यों की सरकारों के मुखिया ‘शोषित समाज’ से ही आते हैं।

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