कक्षा से कब्र तक पहुँचता भारत का बेरोजगार छात्र युवा

कक्षा से कब्र तक पहुँचता भारत का बेरोजगार छात्र युवा
कक्षा से कब्र तक पहुँचता भारत का बेरोजगार छात्र युवा

सतीश शर्मा

कक्षा से कब्र तक पहुँचता भारत का बेरोजगार छात्र युवा – विवेकानंद जी ने कहा था कि ‘‘युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है” यह स्लोगन आप जैसे ही भारत सरकार की युवा सम्बंधी विभाग की वेबसाइट पर जायेंगे देखने को मिल जायेगी इस बात से यह महसूस होता है कि युवजन वर्ग भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है ।

भारत का बेरोजगार छात्र युवा

कक्षा से कब्र तक पहुँचता भारत का बेरोजगार छात्र युवा

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से लेकर राहुल गांधी जी तक अर्थात विपक्ष से लेकर सत्ता पक्ष तक युवजनो की प्रगति को ही देश की प्रगति मानते है भारत का बेरोजगार छात्र युवा आपने भाषणों द्वारा एक दूसरे को युवाओ का मसीहा दिखाने की होड़ में आगे जाने की प्रतिस्पर्धा नजर आती है इसका व्यापक कारण भी है क्योंकि इस देश की कुल आबादी में 65% से अधिक संख्या में युवजन है।

इस देश का युवा वर्ग इस देश को पुनः सोने की चिड़िया बनाने की काबिलियत रखता है यह सब मानते है और युवाओ का कल्याण करने को सभी आतुर दिखते है। जरा रुकिए यदि आप इसे सच मान रहे है तो यह ठीक उसी प्रकार है जैसे चिप्स की पैकेट भरी होती है और खोलने पर हवा निकल जाती है।

आत्महत्या को मजबूर बेरोजगार छात्र-नौजवान

हकीकत कही अधिक भयावह है जिसे पढ़ कर आपके पैरों तले जमीन खिसक जायेगी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ( NCRB ) के आंकड़ों को यदि सच माने तो 21 सदी युवाओ की जान की प्यासी नजर आती है  क्योंकि विगत 16 वर्षों में बेरोजगारी की हालत यह है कि 1 लाख 54 हजार 755 बेरोजगारो ने आत्महत्या कर ली है और प्रतिदिन औसत निकाला जाए तो 26 से अधिक बेरोजगार आत्महत्या कर रहे है।

किन्तु देश को यह भयावह दशा नही दिख रही है दूसरी तरफ़ एक और दर्दनाक और सपनों को तोड़ता आंकड़ा है जिसके अनुसार पढ़ाई के दवाब के कारण विगत 16 वर्षों में 1 लाख 4 हजार 98 छात्रो ने आत्महत्या कर ली है इसका औसत निकाले तो प्रतिदिन 17 से अधिक छात्र आत्महत्या कर रहे है। अर्थात जिस युवा भारत का महिमामंडन किया जा रहा है उस भारत का युवा दशा एक बड़ी त्रासदी से गुजर रहा है लेकिन उस युवा के दर्द को समझने को कोई तैयार नही है ।

अपने ऊलजलूल बयानों द्वारा नेता उसे बस पीड़ा पहुचाने का काम रहे है यदि बेरोजगारो और छात्रों की आत्महत्या के आकड़ो को जोड़ लिया जाए तो विगत 16 वर्षों में 2 लाख 58 हजार 849 युवजनो में आत्महत्या कर ली है यानि प्रत्येक 1 घंटे में छात्र और युवा आत्महत्या कर रहा है ।

और जिस तरह बेरोजगार और युवा भारत मे आत्महत्या कर रहा है ऐसा दुनिया के किसी देश मे नही होता है इस लिस्ट में भारत सबसे ऊपर ही नही बल्कि भारत को भयानक त्रासदी को ले जा रहा है यदि हम और आज नही जागे तो यह आंकड़े और भी अधिक हो सकते है

छात्रो की आत्महत्या के बढ़ते आंकड़े

ग्रह मंत्रालय ने एक रिपोर्ट जारी करके बताया कि 2014 सके 2016 के बीच 24 हजार 345 छात्रो ने आत्महत्या की कर ली । आत्महत्या के कारण कही अधिक डराने वाले है क्योंकि परीक्षा का दवाब या रोजगार न मिल पाने के समान्तर सामाजिक परिवेश का बद से बतर हो जाना है।

यानि सरकारे देश के युवाओ को उनके अनुरूप सहायता नही प्रदान कर रही है शिक्षा प्राप्त करने के बाद उसका कोई महत्व नही है रोजी रोटी पर कोई ध्यान नही है इस दशा में भारत का युवा के पास आंदोलन छोड़ दूसरा विकल्प नही है।

महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा छात्र-नौजवान आत्महत्या करते है

यह हालत केवल  पिछड़े इलाकों गावो में ही नही है बल्कि देश के सबसे ज्यादा रोजगार देने वाले राज्यो में से एक  महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा बेरोजगारो आत्महत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई तो क्या ऐसी भारत का सपना हम सजो रहे है जिसमे युवाओ को केवल वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा बनकर रह गया है

भारत का छात्र युवा जो सत्ता में कौन आयेगा इस बात का निर्णय करता है उस युवा को अगर आत्महत्या करने पर मजबूर कर दे रही है भारत का बेरोजगार छात्र युवा सरकारे तो ऐसी सरकार का महत्व है जिस देश के युवा को देश को प्रगति पथ पर अग्रसर करना चाहिए और दुनिया मे भारत के नाम को स्वर्णिम अक्षरो में दर्ज कराना चाहिए वह सड़क पर आंदोलन कर रहा है या आत्महत्या कर रहा है यह एक भयावह सत्य है जिसको हमको स्वीकार इसके खिलाफ लड़ाई को मजबूती से लड़ना चाहिए क्योंकि भारत का छात्र युवा ही भारत को आगे ले जा सकता है

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