Automobile sector (मोटरवाहन उद्योग) में मंदी से 5 लाख बेरोजगार

Automobile sector (मोटरवाहन उद्योग) में मंदी से 5 लाख बेरोजगार

Automobile sector (मोटरवाहन उद्योग) में मंदी से 5 लाख बेरोजगार-Society of indian automobile Manufacturers के मुताबिक़ जुलाई में बीते 9 महीनों के दौरान सबसे कम 2,00,790 वाहनों की बिक्री ही हुई।

इसके मुताबिक़ Sports utility व्हिकल की बिक्री में 15% तो कार में 36% की गिरावट दर्ज की गई है।

Society of indian automobile Manufacturers के managing director

विष्णु माथुर कहते हैं कि इस इंडस्ट्री को तुरंत एक राहत पैकेज की ज़रूरत है।

उनका कहना है कि GST की दरों में अस्थायी कटौती से भी इंडस्ट्री को कुछ राहत मिल सकती है।

माथुर कहते हैं, “auto industry की स्थिति और बिगड़ने से रोकने के लिए

उद्योग प्रतिनिधियों की सरकार के साथ हाल ही में बातचीत हुई है।

हमने राहत पैकेज की मांग की। गाड़ियों पर GST की दर घटाने,

स्क्रैपेज पॉलिसी लाने और वित्तीय क्षेत्र ख़ासकर ग़ैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को मज़बूत करने की मांग की है।”

3 माह में 2 लाख लोगों का रोज़गार छीना-(fada)

दूसरी ओर federation of automobile dealers association (fada) के मुताबिक़,

इस मंदी की वजह से बीते तीन महीने में दो लाख लोगों का रोज़गार छिन गया है।

बीते एक वर्ष के दौरान एशिया की तीसरी सबसे बड़ी

अर्थव्यवस्था भारत में गाड़ियों की ख़रीद में भारी कमी आई है,

इसकी वजह ग़ैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में क्रेडिट की कमी का होना बताया गया है।

इसकी वजह से इस दौरान देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी

मारुति सुज़ुकी और टाटा मोटर्स ने अपने उत्पादन में कटौती की।

लिहाजा हज़ारों की संख्या में नौकरियां भी ख़त्म हुई हैं।

इनकी वजह से ऑटो इंडस्ट्री अपने सबसे बड़ी गिरावट के दौर में पहुंच गई है।

इन्ही कारणों से Automobile sector (मोटरवाहन उद्योग) में मंदी से 5 लाख बेरोजगार हो सकते है।

सभी कंपनीयो की बिक्री में भारी गिरावट

घरेलू बाज़ार में 51 फ़ीसदी हिस्सा रखने वाली मारुति सुज़ुकी ने जनवरी में 1.42 लाख कारें बेचीं।

लेकिन छह महीने में ही 31% की गिरावट आ गई

और जुलाई में उसकी सिर्फ़ 98,210 कारें बिकीं।

घरेलू बाज़ार में दूसरी बड़ी कार निर्माता कंपनी हुंदई की बिक्री में भी ख़ासी गिरावट हुई है।

Hundai की क़रीब 45 हज़ार कारें जनवरी में बिकी थीं

लेकिन जुलाई में केवल 39 हज़ार कारों की बिक्री के साथ इसमें 15% की गिरावट हो गई।

Automobile company के शेयर में गिरावट

Share Bazar में इन कंपनियों के share में तेज़ गिरावट देखी गई है।

जनवरी से अब तक Maruti के Share की क़ीमतों में 22% की गिरावट हुई है

तो टाटा मोटर्स के शेयर इसी अवधि में 29% गिरे।

इनकी तुलना में मुंबई शेयर सूचकांक सेंसेक्स इस अवधि के दौरान 2.4% बढ़ा है।

मंदी की वजह से कई डीलरशिप बंद हो गए हैं, इसलिए

अब इस उद्योग में GST की दरों में कटौती जैसे उपायों की मांग तेज़ हुई है।

Auto industry के लोगों ने मांग की है कि सरकार को Automobile सेक्टर में GST की दर 28% से घटाकर 18% करनी चाहिए।

Auto sector के प्रतिनिधि मिले वित्त मंत्री से

फ़रवरी से अब तक रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में लगातार चार बार कटौती की है।

लेकिन इंडस्ट्री पर नज़र रखने वाले जानकारों का मानना है

कि तरलता (नक़दी) की कमी को पूरा करने के लिए अभी और उपाय करने होंगे।

बीते हफ़्ते ऑटो सेक्टर के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाक़ात कर उन्हें वर्तमान हालात से अवगत कराया।

सरकार ने ऑटो इंडस्ट्री की मंदी को दूर करने के लिए परामर्श कर रही है,

लेकिन अब तक इसकी मांग को लेकर किसी भी उपाय की घोषणा नहीं की है।

जुलाई में Maruti cars की बिक्री में 34% की कमी

Society of indian automobile Manufacturers के managing director विष्णु माथुर कहते हैं

कि इस महीने से शुरू होने वाले त्योहारी सीजन में भी ज़्यादा छूट नहीं मिल रही है।

Society of indian automobile Manufacturers के managing director कहते हैं,

“अप्रैल में शुरू हुए नए वित्तीय वर्ष में सियाम ने पैसेंजर वीकल की वार्षिक बिक्री

में 3% से 5% तक की वृद्धि का अनुमान लगाया था।

लेकिन अब मंदी को देखते हुए उन पूर्वानुमानों को संशोधित करना पड़ सकता है।”

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जुलाई के महीने में मारुति कारों की बिक्री में 34% की कमी आई

जो सात वर्षों के दौरान किसी एक महीने में दर्ज की गई सबसे अधिक गिरावट है।

बीते वर्ष इस कार निर्माता के कारों की बिक्री में महज 4.7% का ही इजाफ़ा हुआ।

भारत की अर्थव्यवस्था 7वे नम्बर पर गिरी

हाल ही में आई रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ कंपनी ने

अपनी अस्थायी कर्मचारियों की छंटनी शुरू कर दी है।

जून के अंत तक इनकी संख्या में 6% कम हो गई है।

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साथ ही मारुति ने उत्पादन में भी कटौती की है।

इस साल के पहले छह महीनों के दौरान इसने उत्पादन में 10% से अधिक की कटौती की है।

अपने पैसेंजर वीकल की घरेलू बिक्री में 34% गिरावट दर्ज करने वाले

Tata Motors ने बीते हफ़्ते कहा कि

बाज़ार की वर्तमान मुश्किल परिस्थितियों के कारण महाराष्ट्र के कुछ संयंत्रों को बंद कर दिया है।

इस बीच, जुलाई के महीने में 15% गिरावट दर्ज करने वाली प्रतिद्वंद्वी कार निर्माता कंपनी

mahindra & mahindra ने कहा है कि वो इस तिमाही में 14 दिनों तक उत्पादन में कटौती करेगा।

Society of indian automobile Manufacturers (सियाम) के

ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़ जुलाई में सभी सेगमेंट की गाड़ियों की बिक्री में गिरावट हुई है।

26% की कमी के साथ इस दौरान महज 56,866 ट्रक और बस बिके

Society of indian automobile Manufacturers के अनुसार कठिन समय

जबकि क़रीब 15 लाख यूनिट बिक्री के साथ दोपहिया वाहनों में यह कमी 17% दर्ज की गई है।

इस मंदी का प्रभाव गाड़ियों के कलपुर्जे बनाने वाली सहायक कंपनियों पर भी हुआ है।

Tata motors और ashok Leland’s के लिए सस्पेंशन (शॉकर) बनाने वाली

jamna auto industry ने कहा कि कमज़ोर मांग के चलते

अगस्त में वो अपने सभी नौ उत्पादन संयंत्रों को बंद कर सकते हैं।

इस industry पर दोहरी मार तब पड़ी जब जून में बजट के दौरान ऑटो पार्ट्स पर ड्यूटी बढ़ाई गई

और पेट्रोल, डीज़ल पर अतिरिक्त टैक्स लगाया गया।

Society of indian automobile Manufacturers के managing director विष्णु माथुर ने एक न्यूज़ पोर्टल से बातचीत में बताया कि

ऑटो इंडस्ट्री ने 3.7 करोड़ से ज़्यादा लोगों को जॉब दे रखा है और अगर मंदी ख़त्म नहीं हुई तो कई नौकरियां जाएंगी।

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