आधार कार्ड की जानकारी आधार कार्ड होगा बेकार?

आधार कार्ड की जानकारी आधार कार्ड होगा बेधार?

आधार कार्ड होगा बेकार? – सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर व्यक्ति की निजी जानकारी हासिल करने की अनुमति देने से जुड़े आधार कानून के पांच प्रावधानों को निरस्त कर दिया है । प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और अपनी ओर से न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी ने आधार पर फैसला सुनाया है। पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने आधार कानून की धारा 33(2) को निरस्त किया | इसके तहत सरकारी संस्थाए राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए किसी व्यक्ति की बायोमैट्रिक और डेमोग्राफिक जानकारी हासिल कर सकती है।

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आधार कार्ड की जानकारी, आधार कार्ड होगा बेकार?

हालांकि, पीठ ने कहा कि देश की सुरक्षा को खतरे की स्थिति में सचिव से उच्चस्तर के अधिकारी को जानकारी हासिल करने का अधिकार दिया जाना चाहिए। जानकारी के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक न्यायिक अधिकारी को भी जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा पीठ ने आधार नियमन 27(1) को निरस्त कर दिया है। यह नियमन यूआईडीएआई को सत्यापन रिकॉर्ड को पांच साल तक सुरक्षित रखने का अधिकार देता था।

बैंक अकाउंट और मोबाइल सिम में आधार कार्ड की अनिवार्यता ख़त्म ,आधार कार्ड

बेधार

पीठ ने कहा कि कोई भी निजी कंपनी और यहां तक कि यूआईडीएआई भी सत्यापन रिकॉर्ड को छह माह से ज्यादा समय तक अपने पास नहीं रख सकता है। लेनदेन के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने से जुड़े प्रावधान को निरस्त करते हुए पीठ ने संशोधन की जरूरत बताई । धारा 33(1) को निरस्त करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति की जानकारी सार्वजनिक की जा रही है |उसे सुनवाई का एक मौका दिया जाना चाहिए। प्रावधान के तहत जिला जज के आदेश पर व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक की जा सकती है। आधार कार्ड होगा बेकार?

इसके अलावा धारा 47 और 57 को भी निरस्त कर दिया गया| आधार कानून के अलावा पीठ ने मनी लॉन्ड्रिंग कानून के उस प्रावधान को भी निरस्त कर दिया जिसके तहत बैंक खाते को आधार से जोड़ना अनिवार्य था। आधार कार्ड होगा बेधार?

आयकर रिटर्न में परमानेंट अकाउंट नंबर (पैन) नंबर को आधार से जोड़ना अनिवार्य

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और अपनी ओर से न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी ने आधार पर फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आयकर रिटर्न के लिए परमानेंट अकाउंट नंबर(पैन) नंबर को आधार से जोड़ना अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट ने आधार की संवैधानिक मान्यता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए  कहा कि कोई भी मोबाइल कंपनी आधार कार्ड नहीं मांग सकती है।

इस निर्णय के अनुसार आधार कार्ड नंबर को बैंक खाते से जोड़ना अनिवार्य नहीं है | इसी तरह टेलीकॉम सेवा प्रदान करने वाले उपभोक्ताओं को अपने फोन से आधार नंबर को लिंक कराने के लिये नहीं कह सकते है । पीठ ने कहा कि आयकर रिटर्न भरने और पैन कार्ड बनवाने के लिए आधार अनिवार्य है| आधार कार्ड होगा बेकार?

यूआईडीएआई के पूर्व चेयरमैन नंदन नीलेकणि का बड़ा बयान

आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का यूआईडीएआई के पूर्व चेयरमैन और इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि ने स्वागत किया है| उन्होंने इसे आधार के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला करार दिया है | नंदन नीलेकणि ने कहा कि आधार एक विशिष्ट परियोजना है|आधार मामले में सर्वोच्च न्यायालय के पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के फैसले के कुछ घंटे बाद नीलेकणि ने ट्वीट किया | “आधार के पक्ष में यह एक ऐतिहासिक फैसला है आधार एक विशिष्ट पहचान परियोजना है जोकि राष्ट्र के विकास के लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण है ” नदंन नीलेकणि यूनीक आईडेंडिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पहले चेयरमैन थे | वह इस पद पर 2009 से लेकर 2014 तक रहे|उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की प्रमुख योजना में कई संशोधन किए |नीलेकणि ने कहा, “हमने विमर्श व परिचर्चा की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से एक बेहतर और मजबूत आधार बनाया है” आधार कार्ड होगा बेकार |

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