मोदी सरकार 13 Point roster को खत्म करेगी

मोदी सरकार 13 Point roster को खत्म करेगी

मोदी सरकार 13 Point roster को खत्म करेगी-13 Point roster के विरोध में हो रहे बवाल के बीच मोदी सरकार अध्यादेश लाने की तैयारी में है।

कहा जा रहा है कि 7 तारीख को अंतिम कैबिनेट बैठक में इसका फैसला हो सकता है।
इस प्रणाली के तहत sc st और obc अभ्यर्थियों को विश्वविद्यालयों में विभागों में भर्ती के लिए रिज़र्वेशन विभाग को इकाई मान कर दिया जाएगा।

आपको अवगत करा दे कि सुप्रिम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2017 के फैसले को बहाल कर दिया है।

जिसमे रिसर्व सीटो पर भर्ती के लिए यूनिवर्सिटी को इकाई ने मानकर विभाग को इकाई माना था।

इस मामले में रिव्यू पीटीशन को सुप्रीम कोर्ट ने ख़रीच कर दिया था।

क्यों लागू हुआ 13 Point roster

आखिर ऐसे हालात क्यों बने यह समझना जरूरी है।
हाई कोर्ट ने 2017 में ugc अर्थात विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की 2006 की एक गॉइड लाइन को खत्म कर दिया था।

इस प्रावधान के अनुसार विश्वविद्यालय/स्वपोषित विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय को इकाई मानकर रिजर्वेशन के आधार पर भर्ती हो।

Ugc ने यह गाइड लाइन भारत सरकार की आरक्षण नीति को Higher education में सख्ती से लागू करने के लिए मानव संसाधन मंत्रालय के 2005 में दिए गए आदेश के पालन में जारी की थी।

उच्च शिक्षण संस्थानों में विभाग को यदि इकाई माना जाता है तो रिज़र्वेशन सिस्टम पूरी तरह फैल हो जाता है।

इस व्यवस्था को एक उदाहरण द्वारा हम समझ सकते है। यदि हम मान ले एक विभाग 3 professor, 3 associate professor, 3 assistant professor के पद रिक्त हैं तो कुल 9 पद होते हुए।

इनमें से एक भी (अलग-अलग कैडर होने के कारण) रिज़र्वेशन के दायरे में नहीं आएगा क्योंकि obc के लिए किसी एक कैडर में कम-से-कम 4 पद, sc के लिए 7 पद और st के लिए 14 पद होने चाहिए।

इसका मतलब स्पष्ट उच्च शिक्षण संस्थानों
में “ना रहेगा बॉस नही बाजेगी बाँसुरी” वाली कहावत को लागू कर दि गई है।

मोदी सरकार इस मामले में ऊलजलूल बयानबाजी कर है। मोदी सरकार 13 Point roster को खत्म करेगी या नही इस विषय पर साफ साफ कुछ नही बोल रही है।
वह सुप्रीम कोर्ट में याचिका कर दिखावाया कर रही है।

उच्च शिक्षा में रिज़र्वेशन का महत्व

यह बड़ा और दुर्भाग्यपूर्ण सच है कि एक तरफ जहाँ SC/ST 1950 से मिले 15/7.5 प्रतिशत रिज़र्वेशन से पूरी लाभवनित नही रहा है।

दूसरी तरफ OBC को पहले 1953 के काका कालेलकर आयोग के नाम पर भरमाया गया।
उसके बाद उन्हें मंडल आयोग की सिफारिश का एक हिस्सा मात्र भी नही (नौकरी में 52% के स्थान पर 27% आरक्षण) को क्रीमी लेयर की बेड़ियों के साथ 1990 में लागू करके उनके दोखा दिया गया।

इस प्रक्रिया के जरिए दोखबाजी करके देश के बहुसंख्यक आबादी वाले बहुजन समाज को 85% जनसंख्या के अनुपात में सिर्फ 49.5% रिज़र्वेशन देने का प्रावधान तो कर दिया गया था।
लेकिन आज भी यह रिज़र्वेशन पूरी सख्ती से लागू नही हो पाया है।

यही कारण है कि आज भी केंद्र और कई राज्यों की सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति/जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों का प्रतिनिधित्व काफी कम है। इसीलिए मोदी सरकार 13 Point roster को खत्म करेगी या नही बड़ा प्रश्न है।

उच्च शिक्षण संस्थानों में रिज़र्वेशन कब लागू हुआ

higher education institutions के शैक्षिक पदों में SC/ST को 1997 और OBC के लोगों को 2007 से रिज़र्वेशन दिए जाने की शुरुआत हुई।
मगर इन वर्गों का प्रतिनिधित्व Higher Education Institutions में आज तक नहीं बढ़ पाया है।

UGC के आंकड़ों के मुताबिक, 40 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर के पदों पर SC वर्ग के महज 3.47% ST वर्ग के 0.7% लोग ही नियुक्ति किए गए हैं और OBC वर्गों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।

जबकि General वर्ग के 95.2% लोग प्रोफेसर के पदों पर हैं।
एसोसिएट प्रोफेसर के पदों में SC वर्ग के 4.96%, ST वर्ग के 1.3% लोग कार्यरत हैं, OBC वर्गों का प्रतिनिधित्व शून्य है।

इसी तरह असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर SC वर्ग के 12.02%, ST वर्ग के 5.46% और OBC वर्गों का 14.38% कोटा ही भरा गया है जबकि 66.27% पदों पर General वर्ग के लोग कब्जा जमाए बैठे हैं.

इन 40 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक पदों पर भी आरक्षित वर्गों के लोगों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है।

गैर-शैक्षणिक पदों पर SC वर्ग का 8.96%, ST का 4.25%, OBC वर्गों का 10.17% कोटा भरा गया है। जबकि General वर्ग के 76.14% लोग गैर-शैक्षणिक पदों पर बैठे हुए हैं।

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